
बिजनेस डेस्क। कोविड 19 (Covid 19 New Variant) के नए वैरिएंट का असर दुनियाभर के ऑयल मार्केट में देखने को मिला है। अप्रैल 2020 यानी 20 महीने के बाद क्रूड ऑयल की कीमत (Crude Oil Price) में एक में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जहां डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल की कीमत में 13 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वहीं ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 12 फीसदी तक टूट गए हैं। भारत का वायदा बाजार भी इससे अछूता नहीं है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन 12 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ है। जबकि स्थानीय स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई असर नहीं देखने को मिला है।
एक दिन में 9.5 डॉलर सस्ता हुआ ब्रेंट क्रूड
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली। एक दिन में दाम 9.5 डॉलर कम हो गए। ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स के अनुसार ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 11.55 फीसदी की गिरावट के साथ 72.72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। जबकि इसी महीने ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। जानकारों की मानें तो आाने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमत में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
अमरीकी ऑयल 13 फीसदी टूटा
वहीं दूसरी ओर अमरीकी क्रूड ऑयल डब्ल्यूटीआई में 13.06 फीसदी गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को जब ग्लोबल मार्केट बंद हुई तो डब्ल्यूटीआई में 10.24 डॉलर की गिरावट के साथ 68.15 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। जबकि इस महीने की शुरुआत में डब्ल्यूटीआई के दाम 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए थे। जानकारों के अनुसार इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है।
भारत में भी 12 फीसदी की गिरावट
वहीं दूसरी ओर भारत के वायदा बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत में भी करीब 12 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को कारोबार बंद होने के बाद क्रूड ऑयल में 676 रुपए प्रति बैरल की गिरावट के साथ 5186 रुपए प्रति बैरल पर बंद हुआ। शुक्रवार को क्रूड ऑयल की कीमत में 12 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है। बीते एक महीनें में 1000 रुपए तक क्रूड ऑयल सस्ता हो चुका है।
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क्या कहते हैं जानकार
आईआईएफएल के वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता के अनुसार क्रूड ऑयल की कीमत में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 68 डॉलर और डब्ल्यूटीआई के दाम 60 से 62 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रैटिजिक रिजर्व निकालने से ओपेक देशों में थोड़ी हलचल देखने को मिली है। वहीं कोविड नए वैरिएंट से भी ओपेक देश घबरा गए हैं। 2 दिसंबर ओपेक देशों की इस मसले पर मीटिंग भी होने वाली है। जिसमें प्रोडक्शन बढ़ाने पपर बात हो सकती है।
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