
कोलकाता: संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में जारी प्रदर्शनों के चलते छुट्टियों के इस मौसम में भी पर्यटन क्षेत्र की कमर टूट गई है क्योंकि कई देश भारत को यात्रा के लिए फिलहाल असुरक्षित देश बता रहे हैं।
देश के पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कई घरेलू पर्यटक भी कानून-व्यवस्था के मद्देनजर सर्दियों की अपनी छुट्टियां विदेश में बिताने का मन बना रहे हैं। ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष ज्योति मयाल ने मीडिया को बताया, ''हमें विदेशी पर्यटकों से संदेह से भरे कॉल आ रहे हैं जो मीडिया की खबरें पढ़ कर देश की मौजूदा स्थिति के बारे में जानना चाह रहे हैं। अब तक कोई बड़ी यात्रा रद्द नहीं की गई है और न ही तारीखों में बदलाव हुआ है।''
पूर्वोत्तर जाने को लेकर किया आगाह
हालांकि उन्होंने दावा किया कि अगर अशांति इसी तरह जारी रही तो यात्राएं जरूर रद्द होने लगेंगी। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया समेत कुछ अन्य देशों ने परामर्श जारी कर अपने देश के नागरिकों को भारत विशेष कर पूर्वोत्तर जाने को लेकर आगाह किया है।
महज 2.2 प्रतिशत बढ़ी पर्यटकों की संख्या
पर्यटकों की संख्या में इस साल की शुरुआत में भी कुछ खास बढ़ोतरी नहीं हुई थी और माना जा रहा है कि जारी प्रदर्शनों के चलते वह और भी बुरी तरह प्रभावित होगा। आंकड़ों के अनुसार 2019 की पहली छमाही में विदेशी पर्यटकों की संख्या पिछले साल इसी अवधि की तुलना में महज 2.2 प्रतिशत बढ़ी। इस साल 52.66 लाख विदेशी पर्यटक यहां आए।
लगभग हर साल, सर्दियों के मौसम में पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है जिनमें से ज्यादातर असम, सिक्किम और उत्तरी बंगाल आते हैं। हालांकि थॉमस कुक के अध्यक्ष राजीव काले ने कहा कि इस साल इस संख्या में कमी आ सकती है।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
(प्रतीकात्मक फोटो)
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