
नागपुर। क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी (cryptocurrency fraud) के एक मामले में नागपुर पुलिस (Nagpur olice) ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने करीब 2000 निवेशकों से कथित रूप से 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में चार लोगों को पुणे में अरेस्ट किया है। ये चारों एक व्यक्ति को पिछले साल गोली मारकर हत्या किए जाने के भी आरोपी हैं। पुलिस रिकार्ड में यह फरार चल रहे थे।
क्या है मामला?
नागपुर पुलिस ने शनिवार को बताया कि 2,000 निवेशकों को कथित रूप से 40 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में पुणे से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि निशिद वासनिक, उनकी पत्नी प्रगति, गजानन मुनगुने और संदेश लांजेवर को एक साल से अधिक समय तक फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने बताया कि अरेस्ट किए गए आरोपियों के पास से एक पिस्तौल, सात जिंदा कारतूस, एक करोड़ रुपये की चार लग्जरी कारें बरामद हुई है। इसके अलावा उनके पास से 18,91,210 रुपये नकद, आठ सेलफोन और एक लैपटॉप भी मिला है। इन आरोपियों को पुलिस ने पुणे में लोनावाला के पास पंगोली (Pangoli) से पकड़ा है। निशिद, संदेश और गजानन पिछले साल नागपुर से अगवा करके एक व्यक्ति को गोली मराकर वाशिम में हत्या किए जाने के भी आरोपी हैं। एक साल पहले यह हत्या की गई थी।
क्रिप्टोकरेंसी के मामले में दिल्ली पुलिस भी की थी कार्रवाई
बीते महीने जनवरी में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की साइबर क्राइम यूनिट ने घोटालेबाजों के एक समूह को पकड़ने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने दिल्ली के एक व्यवसायी से क्रिप्टोकरेंसी चुराई थी और अमाउंट को फिलिस्तीनी संगठन हमास की सैन्य शाखा अल-कसम ब्रिगेड के वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया था। फ्रॉड करके बिटकॉइन, ईथर और कई अन्य क्रिप्टोकरेंसी के रूप में डिजिटल मुद्रा शामिल थी, को ट्रांसफर किया गया था। व्यवसायी द्वारा 2019 में पश्चिम विहार के एक पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि करीब 6.7 बिटकॉइन, 9.79 ईथर और 2.44 बिटकॉइन कैश तीन खातों में ट्रांसफर किया गया। दो बिटकॉइन को छह खातों में स्थानांतरित किया गया था, जिसमें 'अल-क़सम ब्रिगेड' नाम के एक वॉलेट भी शामिल थे।
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