Deepinder Goyal: लंच ब्रेक की झुंझलाहट और IITian ने खड़ी कर दी 2.57 लाख करोड़ की कंपनी

Published : Jan 21, 2026, 06:02 PM IST

Deepinder Goyal Zomato Journey: क्या कभी आपने सोचा है कि एक लंच ब्रेक आपकी पूरी लाइफ बदल सकता है? ईटरनल CEO पद से रिजाइन देने वाले दीपिंदर गोयल के साथ यही हुआ। जानिए कैसे ऑफिस कैंटीन की झुंझलाहट ने भारत की सबसे बड़ी फूडटेक कंपनी जोमैटो को जन्म दिया। 

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दीपिंदर गोयल का इस्तीफा

ईटरनल फाउंडर और ग्रुप सीईओ दीपेंद्र गोयल अपने पद से हट रहे हैं और ब्लिंकइट के सीईओ अल्बिंदर ढिंडसा उनकी जगह लेंगे। कंपनी ने 21 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंजों को यह जानकारी दी। शेयरहोल्डर्स को लिखे अपने लेटर में गोयल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'हाल ही में, मैं कुछ नए विचारों की ओर आकर्षित हुआ हूं, जिनमें काफी ज्यादा रिस्की इन्वेंशन और एक्सपेरिमेंट्स शामिल हैं। ये ऐसे विचार हैं, जिन्हें ईटरनल जैसी सार्वजनिक कंपनी के बाहर बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।'

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टीचर फैमिली से IIT तक का सफर

पंजाब के मुक्तसर में जन्मे दीपिंदर गोयल के माता-पिता दोनों टीचर थे। घर में पढ़ाई का माहौल था और यही वजह थी कि छोटे दीपिंदर को मैथ्स में अच्छी दिलचस्पी थी। इसी जुनून के चलते दीपिंदर का सेलेक्शन IIT दिल्ली में हो गया, जहां उन्होंने मैथ्स & कंप्यूटिंग में इंटीग्रेटेड एमटेक की डिग्री पूरी की।

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जोमैटो का आइडिया कहां से आया?

2005 में ग्रेजुएशन के बाद दीपिंदर ने Bain & Company में कंसल्टेंट के तौर पर काम शुरू किया, लेकिन ऑफिस में लंच का समय उन्हें परेशान करता था। कैंटीन में लंबी-लंबी लाइन और मेन्यू कार्ड की अफरा-तफरी देखकर दीपिंदर ने देखा कि हर कोई अपना कीमती समय बर्बाद कर रहा है। उन्हें हर दिन इससे झुंझलाहट होती थी। एक इंजीनियर के तौर पर उन्होंने सोचा, क्यों न इसे आसान बनाया जाए? दीपिंदर ने अपने कलीग पंकज चड्ढा के साथ मिलकर कैंटीन के मेन्यू कार्ड्स को ऑनलाइन स्कैन और उपलब्ध करवाने का आइडिया सोचा। इस छोटे से कदम ने यूजर्स से तुरंत ध्यान खींचा और इसे देखते ही हिट्स मिलने लगे। बस यहीं से Foodiebay.com की शुरुआत हुई।

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जोमैटो नाम कैसे पड़ा?

जैसे-जैसे फूडीबे का बिजनेस बढ़ा, दीपिंदर और पंकज ने अपनी नौकरी छोड़ दी। दीपिंदर की पत्नी की आर्थिक मदद और बिजनेस की ग्रोथ ने उन्हें पूरा फोकस Zomato पर लगाने के लिए प्रेरित किया। 2008 में शुरू हुआ फूडीबे, 9 महीनों में ही 2,000 से ज्यादा रेस्टोरेंट्स को जोड़कर दिल्ली-NCR की सबसे बड़ी रेस्टोरेंट डायरेक्टरी बन गया। फूडीबे नाम थोड़ा मुश्किल और उलझन पैदा करने वाला था। इसलिए 2010 में इसे जोमैटो में बदलकर रीब्रांड किया गया। दिल्ली में सक्सेस के बाद जोमैटो ने पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में अपनी मौजूदगी बनाई। 2012 में कंपनी ने विदेशी में भी बिजनेस की शुरुआत की और श्रीलंका, यूएई, यूके, साउथ अफ्रीका और बाद में न्यूजीलैंड, तुर्की और ब्राजील तक बढ़ाया।

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जोमैटो कितनी बड़ी कंपनी है?

दीपिंदर ने हमेशा प्रोडक्ट को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। पंकज चड्ढा ने Zomato Gold और Cloud Kitchen शुरू किए। गौरव गुप्ता ने न्यूट्रीशन बिजनेस और ग्रॉसरी डिलीवरी पर काम किया। कुछ एक्सपेरिमेंट सफल हुए, कुछ असफल, लेकिन हर कदम ने कंपनी को मजबूत बनाया। जैसे-जैसे जोमैटो बड़ा हुआ, सीनियर मेंबर्स के इस्तीफे भी देखने को मिले। पंकज 2018 में और गौरव 2021 में कंपनी छोड़ चुके हैं और अब दीपिंदर गोयल ने Eternal CEO और Zomato से ग्रुप CEO के पद से इस्तीफा दे दिया है। वे अब नए, हाई-रिस्क आइडियाज पर ध्यान देना चाहते हैं। आज ईटरनल की वैल्यू 2.57 लाख करोड़ है।

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