जोमैटो नाम कैसे पड़ा?
जैसे-जैसे फूडीबे का बिजनेस बढ़ा, दीपिंदर और पंकज ने अपनी नौकरी छोड़ दी। दीपिंदर की पत्नी की आर्थिक मदद और बिजनेस की ग्रोथ ने उन्हें पूरा फोकस Zomato पर लगाने के लिए प्रेरित किया। 2008 में शुरू हुआ फूडीबे, 9 महीनों में ही 2,000 से ज्यादा रेस्टोरेंट्स को जोड़कर दिल्ली-NCR की सबसे बड़ी रेस्टोरेंट डायरेक्टरी बन गया। फूडीबे नाम थोड़ा मुश्किल और उलझन पैदा करने वाला था। इसलिए 2010 में इसे जोमैटो में बदलकर रीब्रांड किया गया। दिल्ली में सक्सेस के बाद जोमैटो ने पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में अपनी मौजूदगी बनाई। 2012 में कंपनी ने विदेशी में भी बिजनेस की शुरुआत की और श्रीलंका, यूएई, यूके, साउथ अफ्रीका और बाद में न्यूजीलैंड, तुर्की और ब्राजील तक बढ़ाया।