
नई दिल्ली: कई बार आप जब बैंक में या एटीएम में पैसे निकलने जाते होंगे तो आपके अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस न होने की वजह से आप पैसे नही निकल पाते क्योंकि सेविंग अकाउंट में बैलेंस की कमी होती है इस वजह से आपको अपने अकाउंट में हर वक्त मिनिमम बैलेंस रखना पड़ता है। अलग-अलग बैंकों द्वारा यह सीमा अलग-अलग होती है। वहीं प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खुले खातों में ग्राहकों को किसी भी तरह मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती। ग्राहक जीरो मिनिमम बैलेंस रख सकते हैं। वहीं इस योजना के तहत खुले खातों में ओवरड्रॉफ्ट की सुविधा भी दी जाती है। यानि कि खाताधारकों को जीरो बैलेंस पर पांच हजार रुपए ओवरड्रॉफ्ट की सुविधा दी जाती है। ओवरड्रॉफ्ट एक छोटे वक्त तक के लिए दिया गया लोन होता है।
क्या होती है ओवरड्राफ्ट सुविधा
ओवरड्राफ्ट की सुविधा का मतलब यह है कि अगर किसी जन-धन खाताधारक के बैंक खाते का रिकार्ड अच्छा है तो वह जरूरत पड़ने पर अपने खाते में पैसे नहीं होने पर भी ओवरड्राफ्ट की लिमिट के तहत बैंक से रकम ले सकता है। यह वास्तव में एक छोटी अवधि के एक लोन की तरह है जो बैंक खाते के संचालन की वजह से बैंक द्वारा दी जाने वाली सुविधा है। जन धन खाते में ओवरड्राफ्ट की सुविधा होने पर गरीब परिवारों को साहूकार से ब्याज पर रकम लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
6 मीहनों के लिए होना चाहिए पर्याप्त बैलेंस
ओवरड्राफ्ट का फायदा वो ग्राहक उठा सकते हैं जो पहले 6 मीहनों के लिए योजना के तहत निर्धारित पर्याप्त बैलेंस रखते हैं। इसके साथ ही उन्हें रुपे डेबिट कार्ड से एक्टिब ट्रांजैक्शन करना भी जरूरी होता है। इसके साथ ही ग्राहक का खाता आधार से लिंक्ड होना चाहिए। अगर आपने इन तीनों में से कोई भी चीज नहीं की है तो यह बैंकों के विवेक पर निर्भर करता है कि आपको ओवरड्रॉफ्ट की सुविधा दी जाए या नहीं। बता दें कि 5 हजार रुपए के ओवरड्रॉफ्ट पर बैंक ब्याज भी लेते हैं।
अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री भी जरूरी
इसके अलावा खाताधारक की अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री भी इस सुविधा का लाभ लेने के लिए जरूरी है। क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी होने पर पांच हजार की इस सीमा को 15 हजार रुपए तक बढ़ाया भी जा सकता है। ओवरड्रॉफ्ट पर बैंक 12 प्रतिशत से 20 प्रतिशत का ब्याज लेते हैं।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत बैंकों में अब तक 35.99 करोड़ खाते खोले गए हैं इनमें से 29.54 करोड़ खाते ऑपरेशनल हैं।
(प्रतीकात्मक फोटो)
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