
Indian Stock Market News: अमेरिका में H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़ी सख्ती के बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह ढह गया। हालांकि, बाजार के आंकड़े इस दावे की पुष्टि नहीं करते। अमेरिकी अधिकारी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। जानिए मामले की पूरी डिटेल।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 8 अक्टूबर को आठ आईटी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया पर रोक लगाने की कार्रवाई की। इस प्रक्रिया को PERM यानी Permanent Labor Certification कहा जाता है। यह अमेरिका में स्थायी निवास पाने के इच्छुक कई विदेशी कर्मचारियों के लिए अहम कदम है। इसी बीच अमेरिकी राजनीतिक टिप्पणीकार बेनी जॉनसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि इस फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह क्रैश हो गया। पोस्ट में Cognizant, Infosys, TCS, Wipro, HCL और Capgemini जैसी कंपनियों का जिक्र करते हुए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर सवाल उठाए गए। हालांकि, बाजार के समय और उपलब्ध आंकड़ों से यह दावा मेल नहीं खाता।
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अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी एस्पोसिटो ने इस पोस्ट पर ‘Ruh roh’ लिखकर प्रतिक्रिया दी। इस टिप्पणी को कई लोगों ने भारतीयों पर तंज के तौर पर देखा। विवाद की बड़ी वजह यह रही कि जिस दावे पर प्रतिक्रिया दी गई, उसमें शेयर बाजार की गिरावट को लेकर भ्रामक जानकारी शामिल थी। नीचे देखें वायरल पोस्ट-
The Indian stock market completely COLLAPSED today after the Trump Administration suspended H-1B and foreign labor programs over fraud.
The largest IT outsourcing firms in the world, Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL and Capgemini were removed from the Permanent Labor Certification Program.
75% of Cognizant employees in the U.S. are Indian nationals.
Infosys, Tata, Wipro and HCL are all based in India.
Since 2009, these companies alone have requested almost 3 million foreign workers, received over 230,000 H-1B visa approvals and more than 100,000 permanent labor certifications.
This is a devastating for foreigners replacing U.S. citizens and a major win for American workers.
Was their entire economy based on scamming our country?
— Benny Johnson (@bennyjohnson) October 8, 2026
8 अक्टूबर को भारतीय बाजार में गिरावट जरूर दर्ज की गई थी, लेकिन इसे अमेरिकी प्रशासन की घोषणा का नतीजा बताना सही नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बाजार बंद होने के कई घंटे बाद अमेरिकी फैसले की घोषणा हुई थी। ऐसे में उस दिन की गिरावट को इस फैसले से जोड़ने का दावा समयक्रम के हिसाब से भी गलत है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ब्याज दरों को लेकर चिंताओं को बाजार की कमजोरी से जोड़ा गया।
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शुक्रवार, 9 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 292 अंक चढ़कर 71,876.10 पर पहुंचा, जबकि Nifty में 84.60 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,310.40 के स्तर पर रहा। TCS के शेयरों में 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। कंपनी ने दूसरी तिमाही में 15 फीसदी की बढ़त के साथ 13,884 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। Infosys और HCL Tech समेत अन्य शेयरों में भी मजबूती देखी गई।
अमेरिकी वीजा नीति में बदलाव भारतीय आईटी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों के लिए अहम हो सकता है, लेकिन इससे भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह क्रैश होने का दावा उपलब्ध आंकड़ों से साबित नहीं होता। ऐसे में निवेशकों के लिए सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय बाजार के वास्तविक आंकड़ों और आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करना जरूरी है।
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