Why Stock Market Is Falling Today: गुरुवार को शेयर बाजार में भारी तबाही देखने को मिली। निफ्टी 52-हफ्तों के नए निचले स्तर पर आ गया। कुछ घंटों में ₹11 लाख करोड़ साफ हो गए।

Share Market Crash: गुरुवार का कारोबारी दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए किसी बड़े झटके से कम साबित नहीं हुआ। दलाल स्ट्रीट पर सुबह से ही चौतरफा बिकवाली की ऐसी आंधी चली कि देखते ही देखते बीएसई सेंसेक्स 1,200 अंकों से ज्यादा फिसलकर 71,400 के नीचे आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty 50) करीब 2% का गोता लगाते हुए 22,179 के स्तर पर जा पहुंचा—यह अप्रैल 2025 के बाद यानी पिछले एक साल (52-week low) का सबसे निचला स्तर है। इस भयंकर बिकवाली का नतीजा यह हुआ कि चंद घंटों में BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 460 लाख करोड़ रुपए के नीचे आ गया। यानी सीधे शब्दों में कहें तो निवेशकों की जेब से करीब ₹11 लाख करोड़ की पूंजी मिनटों में साफ हो गई। जानिए बाजार में गिरावट की 5 सबसे बड़ी वजहें...

आज किन शेयरों की हुई सबसे ज्यादा पिटाई?

दलाल स्ट्रीट पर मचे इस कोहराम में दिग्गज कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिरे। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), आईटीसी (ITC), इंडिगो (IndiGo), अडानी पोर्ट्स और पावर ग्रिड जैसे बड़े शेयरों में 3% से 4% तक की बड़ी गिरावट देखी गई। इस भारी लाल निशान के बीच केवल आईटी सेक्टर के शेयरों (TCS, Infosys, Tech Mahindra, HCL Tech) और टाइटन ने 1% से 2% की बढ़त बनाकर बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश की, लेकिन वे चौतरफा बिकवाली को रोक नहीं पाए।

शेयर बाजार अचानक क्यों क्रैश हुआ? 5 बड़ी वजहें

4 साल में पहली बार RBI का सख्त फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगभग चार साल में पहली बार दरों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक ने अपने रुख को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (सख्त नीति) कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है, बल्कि दरें और बढ़ सकती हैं। महंगे लोन की आशंका से इक्विटी मार्केट में डर फैल गया।

विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। पिछले महज 9 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशक करीब ₹57,000 करोड़ के शेयर बेच चुके हैं। जब बड़े विदेशी फंड लगातार माल बेचते हैं, तो घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ना तय हो जाता है।

कच्चा तेल फिर $102 के पार

मिडिल ईस्ट में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऑयल टैंकरों पर बढ़ते हमलों की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड 2% उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए महंगे कच्चे तेल से देश में महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने का सीधा खतरा पैदा हो जाता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 24 साल के रिकॉर्ड स्तर पर

अमेरिका में 30 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5.71% और 10 साल की यील्ड 5.3% के पार पहुंच गई है, जो पिछले 24 सालों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। जब अमेरिका में बॉन्ड पर बिना किसी जोखिम के 5% से ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे विकासशील बाजारों से पैसा निकालकर वहां लगाने लगते हैं।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले डर

अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) के अधिकारियों की हालिया बैठक के मिनट्स से संकेत मिले हैं कि वे भी महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकते हैं। ट्रेडर्स मान रहे हैं कि दिसंबर तक अमेरिका में दरों का बढ़ना लगभग तय है, जिससे दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में घबराहट बनी हुई है।

डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह (Investment Advice) न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी तरह के निवेश या शेयर खरीदने-बेचने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।