ओला, उबर को सरकार की चेतावनी, कंज्यूमर कंप्लेन का हो समाधान, वर्ना होगी कार्रवाई

Published : May 10, 2022, 02:38 PM IST
ओला, उबर को सरकार की चेतावनी, कंज्यूमर कंप्लेन का हो समाधान, वर्ना होगी कार्रवाई

सार

सरकारी अधिकारी के अनुसार हमने उन्हें चेतावनी दी है कि वे उपभोक्ता शिकायतों के निवारण के लिए तत्काल संभावित समाधान लेकर आएं अन्यथा सक्षम अधिकारी उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेंगे।

बिजनेस डेस्क। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैब एग्रीगेटर्स ओला, उबर, जुगनू और मेरु उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा ऑपरेशन, फेयर प्राइसिंग एल्गोरिदम और ड्राइवर्स पेमेंट स्ट्रक्चर्स पर डिटेल को एक्सप्लेन करने के लिए बुलाई गई बैठक में भाग ले रहे हैं। चर्चा के बाद, कंज्यूमर की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर्स के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए इनपुट शामिल किए जाएंगे।

इसलिए बुलानी पड़ी बैठक
गाइडलाइन  केंद्रीय और राज्य परिवहन विभागों द्वारा जारी पहले से मौजूद प्रोटोकॉल से अलग होंगे। जानकारी के अनुसार उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा निर्धारित डेडलाइन के साथ कंज्यूमर शिकायतों को दूर करने के लिए एसओपी निर्धारित करने की संभावना है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कैब एग्रीगेटर्स, मुख्य रूप से ओला और उबर के खिलाफ शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद एक बैठक बुलाई। यह बैठक यात्रियों की शिकायतों के बाद हुई है, जिसमें कैब किराए में बढ़ोतरी और ऐसे मामले भी शामिल हैं जब ड्राइवर्स ने तेल और गैस की बढ़ती दरों का हवाला देते हुए वाहन में एसी चालू करने से इनकार कर दिया है। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने सीएनबीसी-टीवी18 को बताया कि हमने कैब एग्रीगेटर्स से सख्ती से उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करने को कहा है। हमने उन्हें चेतावनी दी है कि वे उपभोक्ता शिकायतों के निवारण के लिए तत्काल संभावित समाधान लेकर आएं अन्यथा सक्षम अधिकारी उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेंगे।

फेयर एल्गोरिदम पर भी होगी बात
सरकार इस बात पर भी गौर कर रही है कि डेस्टीनेशन के साथ-साथ कैंसिलेशन चार्ज के अनुसार किराया कितना सही और उचित है। दिल्ली में यात्रियों को पिछले महीने कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि कई ऑटो और कैब चालकों ने फ्यूल की बढ़ती कीमतों के विरोध में हड़ताल का ऐलान किया था। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) कैब एग्रीगेटर्स से उनके एल्गोरिदम पर भी मुलाकात करेगी, जो यात्रियों को उबर और ओला ड्राइवरों के राइड कैंसिलेशन, कैंसिलेशन चार्ज, रैंडम सर्ज प्राइसिंग और लंबे वेटिंग टाइम के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

71 फीसदी का मानना है समस्या जारी है
रेगुलेटर कैब-हेलिंग प्लेटफॉम्र्स को अन्य मुद्दों पर पूछताछ के साथ-साथ राइड कैंसिलेशन और सर्ज प्राइसिंग से संबंधित अपने एल्गोरिदम दिखाने के लिए कहने के लिए तैयार है। पिछले महीने कंयूनिटी बेस्ड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल की एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 71 फीसदी ग्राहकों का कहना है कि मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइन 2020 के बावजूद ड्राइवर्स द्वारा सवारी रद्द करने की समस्या जारी है।

यह भी मांगी है जानकारी
ऐप-बेस्ड टैक्सी कंज्यूमर्स में से 45 फीसदी से अधिक ने कहा कि मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइन 2020 द्वारा निर्धारित सीमा के बावजूद सर्ज प्राइसिंग में उनसे 1.5 गुना से अधिक शुल्क लिया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ ड्राइवरों द्वारा निजी यात्राएं करने के लिए जबरन वसूली की प्रथाओं को उपभोक्ताओं द्वारा एक प्रमुख चिंता के रूप में बताया गया था। उपभोक्ता मामलों के सचिव ने सोमवार को पीटीआई से कहा था, 'हमने कैब एग्रीगेटर्स से जानकारी मांगी है कि वे कैंसिलेशन चार्ज और सर्ज प्राइसिंग को कैसे संभालते हैं और किराए की गणना कैसे करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमने पूछा है कि दो अलग-अलग लोगों के लिए बिंदु ए से बिंदु बी तक जाने के शुल्क अलग-अलग क्यों हैं।" मंत्रालय यह भी जानना चाहेगा कि इन राइड-हेलिंग ऐप ने अपने उपभोक्ताओं के डेटा की सुरक्षा के लिए प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त उपाय किए हैं या नहीं।

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