
Torn Note Exchange Rule: देश के ज्यादातर राज्यों में झमाझम बारिश हो रही है। मान लीजिए आप कहीं गए हैं और अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। आप भीगते-भागते घर पहुंचे, राहत की सांस ली, लेकिन जैसे ही जेब में हाथ डाला...दिल बैठ गया। जेब में रखा ₹500 का करारा नोट पानी से गलकर या फट चुका है। अब पहला ख्याल आता है, '₹500 पानी में गए! अब इसे कोई नहीं लेगा।' अगर आपको भी ऐसा लगता है, तो टेंशन लेने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। देश के केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का एक ऐसा नियम है, जिसके तहत बैंक को न सिर्फ आपका वो गला-फटा नोट लेना पड़ेगा, बल्कि उसके बदले आपको पूरे पैसे भी देने होंगे। आइए जानते हैं ऐसे समय आपको क्या करना है...
RBI के नियमों (RBI Note Refund Rules) के मुताबिक, कोई भी बैंक ऐसे नोटों को लेने से मना नहीं कर सकता, जो गंदे हो गए हैं, फट गए हैं या पानी में भीगने की वजह से गल गए हैं। चाहे सरकारी बैंक हो या प्राइवेट, हर बैंक की शाखा (Branch) पर यह नियम लागू होता है। आपको बस अपने नजदीकी बैंक में जाना है, भले ही आपका वहां आपका खाता (Account) हो या न हो।
बैंक में नोट बदलने का एक पैमाना होता है। बैंक अधिकारी यह देखते हैं कि आपके फटे या गले हुए नोट का कितना हिस्सा सुरक्षित बचा है। ₹500 के नोट की बात करें, तो अगर आपके ₹500 के नोट का 80% या उससे ज्यादा हिस्सा सही-सलामत है, तो बैंक आपको बदले में पूरे ₹500 का नया नोट देगा। अगर नोट ज्यादा खराब हो चुका है और उसका सिर्फ 40% से 80% तक का हिस्सा ही बचा है, तो आपको नोट की कुल कीमत का आधा यानी ₹250 वापस मिलेगा।
अगर आपके पास जो ₹500 का नोट है, उसका हिस्सा 40% से भी कम बचा है या नोट बिल्कुल राख या लुगदी बन चुका है, जिसे पहचान पाना भी मुश्किल हो, तो फिर बैंक उसे स्वीकार नहीं करेगा और आपको एक भी रुपया नहीं मिलेगा।
अगर कोई बैंक अधिकारी आपका जायज यानी सही नोट बदलने से मना करता है, तो आप उस बैंक के मैनेजर से सीधे शिकायत कर सकते हैं। नियम उल्लंघन पर बैंक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ जागरूकता और सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों (Informational Purposes) के लिए है। बारिश में भीगे, गले या कटे-फटे नोटों को बदलने के नियम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक गाइडलाइंस पर आधारित हैं। नोट बदलने या उसके बदले मिलने वाली राशि का अंतिम फैसला नोट की वास्तविक स्थिति को देखने के बाद संबंधित बैंक अधिकारी द्वारा ही लिया जाता है। किसी भी विवाद या असमंजस की स्थिति में RBI के आधिकारिक नियमों को ही अंतिम माना जाए।
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