कोयला मंत्रालय की 37,500 करोड़ रुपये की सरफेस कोल गैसीकरण योजना में उद्योग जगत ने गहरी दिलचस्पी दिखाई है। एक प्री-एप्लीकेशन कॉन्फ्रेंस में पीएसयू और निजी कंपनियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसका मकसद घरेलू कोयले के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा देना है।

नई दिल्ली [भारत], 20 जुलाई (एएनआई): कोयला मंत्रालय ने कहा कि सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन योजना में उद्योग जगत ने गहरी दिलचस्पी दिखाई है। बोली प्रक्रिया से पहले सोमवार को आयोजित एक प्री-एप्लीकेशन कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, निजी कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और संभावित आवेदकों ने हिस्सा लिया।

कोयला मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कॉन्फ्रेंस अतिरिक्त सचिव मनोज कुमार झा की अध्यक्षता में हुई। इसका आयोजन संभावित आवेदकों के लिए योजना के दिशानिर्देशों और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) को स्पष्ट करने के लिए किया गया था। मंत्रालय ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस में "सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, निजी कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और संभावित आवेदकों की उत्साही भागीदारी देखी गई, जो घरेलू कोयले के स्वच्छ और मूल्य-वर्धित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रमुख पहल में उद्योग की मजबूत रुचि को दर्शाता है।"

कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ?

इस सत्र के दौरान, अधिकारियों ने योजना के दिशानिर्देशों और RFP के बारे में विस्तार से बताया। इसमें "पात्रता मानदंड, मूल्यांकन पद्धति, वित्तीय प्रोत्साहन और आवेदन प्रक्रिया" शामिल थी। साथ ही, प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब भी दिए गए।

योजना का उद्देश्य और लक्ष्य

मंत्रालय ने बताया कि 37,500 करोड़ रुपये की इस योजना को 13 मई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं के विकास में तेजी लाना और मूल्य-वर्धित उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

विज्ञप्ति के अनुसार, यह योजना "सिंथेटिक नेचुरल गैस, अमोनिया, मेथनॉल, डीआरआई, सिंथेटिक ईंधन और रसायन जैसे उच्च-मूल्य वाले डाउनस्ट्रीम उत्पादों" के उत्पादन में सहायता करेगी।

योजना से क्या फायदे होंगे?

मंत्रालय ने कहा कि इस योजना से लगभग 2.5 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। इससे सालाना लगभग 75 मिलियन टन कोयले का उपयोग संभव होगा, लगभग 50,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आयातित ऊर्जा व रासायनिक उत्पादों पर भारत की निर्भरता कम होगी।

कोयला मंत्रालय ने प्रतिभागियों को यह भी सूचित किया कि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर है और सभी पात्र संस्थाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने प्रस्ताव जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

मंत्रालय के अनुसार, इस प्री-एप्लीकेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन संभावित आवेदकों को योजना को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने और सरकार के कोयला गैसीकरण कार्यक्रम में व्यापक भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था। (एएनआई)

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