UP Mau Hospital Case: 2025 में सील इंद्रजीत हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद महिला और नवजात की मौत हो गई। CMO के मुताबिक अस्पताल पीछे के रास्ते से चल रहा था। जानिए पूरा मामला और प्रशासन की कार्रवाई।
मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्रशासन की ओर से पहले ही सील किए जा चुके एक प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लगा था, लेकिन पीछे के रास्ते से इलाज का काम चल रहा था। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को दोबारा सील कर दिया। यह मामला रतनपुरा स्थित इंद्रजीत हॉस्पिटल का है। बलिया जिले के तरगौली गांव निवासी अजीत राजभर ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के पास शिकायत की है।
Maternity Case: डिलीवरी के बाद नवजात की मौत
शिकायत के मुताबिक, अजीत की गर्भवती पत्नी सरिता को 8 सितंबर को इंद्रजीत हॉस्पिटल ले जाया गया था। परिवार का कहना है कि एक आशा वर्कर ने उन्हें अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी थी। आरोप लगाया गया है कि डॉक्टर हिमांशु यादव ने सरिता की हालत गंभीर बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। डिलीवरी के बाद नवजात बच्चे की मौत हो गई। सरिता को लगातार ब्लीडिंग होती रही। परिवार का आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने आगे इलाज करने से इनकार कर दिया। अजीत अपनी पत्नी को मऊ के एक दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां से उन्हें वाराणसी रेफर किया गया। वाराणसी के एक प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टरों ने सरिता को मृत घोषित कर दिया।
Sealed Hospital: 2025 में प्रशासन ने की थी कार्रवाई
मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पंकज राय ने बताया कि इंद्रजीत हॉस्पिटल को जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर 2025 में सील किया गया था। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन पीछे के रास्ते से किए जाने की जानकारी सामने आई। घटना की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के साथ मौके पर पहुंचकर अस्पताल को फिर से सील कर दिया।
Hospital Action: संचालक पर FIR की तैयारी
अस्पताल संचालक के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है और FIR की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि जिस अस्पताल को पहले ही सील किया जा चुका था, वहां दोबारा मरीजों का इलाज कैसे शुरू हुआ। मामले में महिला और नवजात की मौत के कारणों के साथ-साथ सील किए गए अस्पताल में इलाज चलने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।


