Petrol-Diesel Price: पश्चिमी एशिया में तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ये दाम मई में हुए बदलाव के बाद से स्थिर हैं, जिससे तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है।
Petrol Diesel Price Today: 11 सितंबर को भी भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। यह तब है जब पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इससे भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है और देश के फ्यूल इंपोर्ट बिल को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
आज जो रिटेल रेट लागू हैं, वे सरकारी तेल कंपनियों द्वारा 25 मई को किए गए बदलाव के हिसाब से ही हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मई में हुए इस बदलाव के बाद से ही ईंधन की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं, जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम काफी बढ़ चुके हैं।
आज के पेट्रोल और डीजल रेट: शहर-वार कीमतें
| शहर | पेट्रोल की कीमत (रुपये/लीटर) | डीजल की कीमत (रुपये/लीटर) |
| दिल्ली | 102.12 रुपये | 95.20 रुपये |
| मुंबई | 114.05 रुपये | 98.42 रुपये |
| कोलकाता | 113.45 रुपये | 99.15 रुपये |
| चेन्नई | 113.23 रुपये | 100.75 रुपये |
| बेंगलुरु | 110.95 रुपये | 97.74 रुपये |
| हैदराबाद | 115.00 रुपये | 103.00 रुपये |
ध्यान दें: राज्यों के टैक्स और अन्य स्थानीय शुल्कों के कारण अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग हो सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर बुरा असर पड़ा है। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन निगेटिव में चला गया है, जबकि डीजल पर दबाव और भी ज्यादा है। 8 सितंबर को इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत 108.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, और सितंबर का औसत भी ऊंचा बना हुआ है।
कच्चे तेल में यह उछाल ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और उस क्षेत्र से तेल सप्लाई में रुकावट के कारण आया है। ब्रेंट फ्यूचर्स हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया, जबकि पश्चिमी एशिया से सप्लाई की चिंताओं ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा दी है। जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से काफी ऊपर बनी रहती हैं, तो ही देश में ईंधन की कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी खास तौर पर मायने रखती है क्योंकि देश अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें बढ़ने से आयात का बिल बढ़ सकता है और ट्रांसपोर्टेशन समेत दूसरे सेक्टर्स में महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
आम लोगों के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि कच्चा तेल 100 डॉलर के पार जाने के बावजूद पंप पर कीमतें नहीं बढ़ी हैं। हालांकि, अगर कच्चे तेल की यह तेजी बनी रहती है, तो घरेलू ईंधन की कीमतों पर फिर से दबाव बन सकता है।
