लखनऊ में सीएम योगी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछने का प्रयास करने वाली स्वतंत्र पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। पत्रकार ने अभद्रता और धमकियों का आरोप लगाया है, जिसे बीजेपी ने खारिज कर दिया।

UP News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश करती है, लेकिन सीएम योगी हाथ का इशारा करते हुए मंच से आगे बढ़ जाते हैं। उनके साथ मौजूद बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेता भी उनके पीछे निकल जाते हैं। इस पूरी घटना के बाद से संबंधित महिला पत्रकार को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है और उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

 घर पर बुलडोजर चलाने की धमकी और अभद्रता का आरोप

वीडियो में दिख रही स्वतंत्र पत्रकार की पहचान दिव्या श्रीवास्तव के रूप में हुई है। एक यूट्यूब चैनल से बातचीत के दौरान दिव्या ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल पूछने का प्रयास किया, तो कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ अभद्रता की। दिव्या ने यह भी दावा किया कि उन्हें घर पर बुलडोजर चलाने जैसी धमकियां दी जा रही हैं। बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह इससे पहले भी बीजेपी की कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कवर करने जाती रही हैं।

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कौन हैं दिव्या श्रीवास्तव?

दिव्या श्रीवास्तव एक स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम करने की बात खुद कहती हैं। उन्होंने बताया है कि वह पहले भी बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाती रही हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में मास्टर्स किया है और आगे PhD की तैयारी करने की बात कही है। उनका नाम 12 सितंबर 2026 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अचानक चर्चा में आया। वायरल वीडियो में वह मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद सवाल पूछने की कोशिश करती दिखती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री वहां से आगे बढ़ गए।

Lucknow Press Conference Controversy: बारिश, जलभराव और एक्सप्रेस-वे से जुड़े थे सवाल

पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव के मुताबिक, वह उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुई बारिश के कारण पैदा हुए जलभराव और एक्सप्रेस-वे पर आ रही तकनीकी व बुनियादी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से जवाब चाहती थीं। उन्होंने बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम योगी के करीब आधे घंटे के संबोधन के बाद जब वह जाने लगे, तब सवाल पूछा गया, लेकिन उन्हें इसका मौका नहीं दिया गया। लखनऊ में अकेले रहने के कारण अब ऑनलाइन मिल रही धमकियों से वह अपनी सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं। इस मुद्दे पर यूथ कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पत्रकार का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

क्या उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया?

यहां सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है। सोशल मीडिया पर दावा चला कि सवाल पूछने के बाद दिव्या की नौकरी चली गई। लेकिन एक ताजा रिपोर्ट में दिव्या के हवाले से कहा गया है कि वह अभी भी अपने न्यूज नेटवर्क के साथ काम कर रही हैं और उन्होंने नौकरी जाने के दावे का खंडन किया है। इसलिए “सवाल पूछने पर नौकरी से निकाल दिया गया” को फिलहाल तथ्य की तरह लिखना उचित नहीं होगा।

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 बीजेपी ने खारिज किए आरोप, दी पुलिस शिकायत की सलाह

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने महिला पत्रकार के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पार्टी के 'सेवा संकल्प अभियान' की जानकारी देने के लिए बुलाई गई थी और इसमें सवाल-जवाब का कोई तय सत्र नहीं था। राकेश त्रिपाठी ने कहा कि मॉडरेटर ही यह तय करता है कि सवाल लिए जाएंगे या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम के जाने के बाद वीडियो फुटेज बनाने के मकसद से यह सब किया गया। इसके साथ ही बीजेपी प्रवक्ता ने पत्रकार की पेशेवर पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी महिला या पत्रकार को सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही हैं, तो उन्हें तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।