
GDP Growth Q1: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8% की वास्तविक GDP ग्रोथ दर्ज की है। वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास गति को बनाए रखा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 31 अगस्त 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए GDP के तिमाही अनुमान जारी किए। इसमें स्थिर कीमतों (2022-23) और मौजूदा कीमतों पर GDP के साथ-साथ इसके अलग-अलग व्यय घटकों के आंकड़े भी शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में नॉमिनल GDP का अनुमान ₹88.27 लाख करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में यह ₹80.00 लाख करोड़ था। इस आधार पर नॉमिनल GDP में 10.3% की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, स्थिर यानी वास्तविक कीमतों पर GDP का अनुमान वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ₹81.36 लाख करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह ₹75.46 लाख करोड़ था। इस तरह वास्तविक GDP की ग्रोथ 7.8% रही।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में रियल GVA का अनुमान ₹73.82 लाख करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह ₹68.21 लाख करोड़ था। इस तरह रियल GVA में 8.2% की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, पहली तिमाही में नॉमिनल GVA ₹80.53 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में नॉमिनल GVA ₹72.24 लाख करोड़ था। इसके आधार पर नॉमिनल GVA में 11.5% की वृद्धि हुई है।
MoSPI ने 27 फरवरी 2026 को 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर वार्षिक और तिमाही GDP अनुमानों की नई सीरीज जारी की थी। इसके बाद 5 जून 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP के अनंतिम यानी प्रोविजनल अनुमान जारी किए गए थे। अब जारी नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स (NAS) प्रकाशन में वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए अपडेटेड वार्षिक संशोधित अनुमान भी शामिल किए गए हैं। इन अनुमानों को तैयार करने में आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और बैंकिंग सर्विसेज प्राइस इंडेक्स (BkSPI) की 2022-23 बेस ईयर वाली नई सीरीज के साथ अलग-अलग प्रशासनिक स्रोतों से मिले अपडेटेड डेटा का इस्तेमाल किया गया है।
MoSPI ने बताया है कि GDP अनुमानों को तैयार करने में इस्तेमाल की गई मेथडोलॉजी और डेटा स्रोतों की विस्तृत जानकारी सितंबर 2026 में जारी होने वाले 'Sources and Methods' प्रकाशन में दी जाएगी। साथ ही, अलग-अलग स्रोत एजेंसियों से मिलने वाले बेहतर डेटा कवरेज और इनपुट डेटा में होने वाले संशोधनों का असर GDP के आगे के अनुमानों पर पड़ सकता है। इसलिए जारी किए गए GDP और दूसरे आर्थिक अनुमानों में भविष्य में संशोधन होने की संभावना बनी हुई है।
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