
बिजनेस डेस्कः जब टैक्सपेयर एक्चुअल टैक्स लायबिलिटी (Tax Liability) से ज्यादा इनकम टैक्स (Income Tax) का भुगतान करता है तो वह एक्सट्रा अमाउंट वापस पाने का भी हकदार होता है। भुगतान किया गया एक्स्ट्रा अमाउंट आईटी डिपार्टमेंट (Income Tax department) असेसमेंट के बाद वापस करता है। टैक्सपेयर अपना आईटीआर (Income Tax Return) दाखिल करके रिफंड ले सकते हैं। उन्हें रिटर्न में अपनी इनकम और डिडक्शन के बारे में सभी डॉक्युमेंट्स जमा कराने होते हैं। रिफंड का क्लेम करने के लिए रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
रिटर्न दाखिल करने के बाद आईटी विभाग रिटर्न को वेरिफाई करेगा। उसके बाद कंफर्म करेगा कि वो रिफंड के लिए एलिजिबल है या नहीं। टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर द्वारा रिटर्न को ई-वेरिफाई करने के बाद ही रिफंड प्रोसेस करता है। आमतौर पर ई-वेरिफिकेशन की तारीख से रिफंड जमा होने में 25-60 दिन लगते हैं।
सीपीसी कंफर्म करेगा रिफंड एलिजिबल हैं या नहीं
जब कोई टैक्सपेयर अपनी रिफंड क्लेम करता है तो टैक्स डिपार्टमेंट इस तरह के रिटर्न को प्रोसेस करता है। टैक्सपेयर्स को धारा 143 (1) के तहत सीपीसी से एक सूचना प्राप्त होगी, जो टैक्सपेयर्स को कंफर्म करेगा कि आप रिफंड के एलिजिबल हैं या नहीं।
इनकम टैक्स रिफंड करें चेक
इनकम टैक्स रिफंड चेक करने का तरीका बेहद आसान है। टैक्सपेयर्स अपने पैन नंबर और निर्धारण वर्ष के माध्यम से अपने रिफंड के स्टेटस को चेक करर सकते हैं। इसे दो अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है। पहला तरीका है नया इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल और तरीका है एनएसडीएल पोर्टल।
ई-फाइलिंग पोर्टल पर ऐसे करें चेक
एनएसडीएल पोर्टल ऐसे करें यूज
यह भी पढ़ें- क्या होता है GST? कैसे सरकार इसे राज्य और केंद्र में बांटती है, जानिए 3 तरह से तय होता है टैक्स
व्यापार समाचार: Read latest business news in Hindi, Investment News, Insurance News, Personal Finance Tips & Budget News Live Updates at Asianet Hindi News