
वाशिंगटन: दुनिया की जानी-मानी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) अपने बेबी पाउडर और दूसरे टैल्क-आधारित प्रोडक्ट्स को लेकर सालों से चल रहे कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए तैयार हो गई है। कंपनी पर हजारों महिलाओं ने आरोप लगाया था कि उसके प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने से उन्हें ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) हुआ। अब कंपनी ने इन मामलों को निपटाने के लिए 6.5 बिलियन डॉलर (करीब 52,676 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने पर सहमति जताई है।
यह कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे लंबी और महंगी कानूनी लड़ाइयों में से एक है। अमेरिका में J&J के खिलाफ लगभग 76,000 केस दर्ज किए गए थे। कंपनी ने अब जो सेटलमेंट ऑफर दिया है, वह तभी लागू होगा जब कम से कम 95% शिकायतकर्ता इसे स्वीकार कर लेंगे।
शिकायत करने वालों का कहना था कि J&J के बेबी पाउडर में मौजूद टैल्क में एस्बेस्टस मिला हुआ था, जो कैंसर का कारण बनता है। वहीं, जॉनसन एंड जॉनसन लगातार इन आरोपों से इनकार करती रही है। कंपनी का कहना है कि उसके प्रोडक्ट्स पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनसे कैंसर नहीं होता। कंपनी ने साफ किया है कि वह यह समझौता इसलिए नहीं कर रही क्योंकि उसके प्रोडक्ट्स में कोई कमी है, बल्कि इसलिए ताकि सालों से चल रही इस कानूनी लड़ाई और अनिश्चितता को खत्म किया जा सके, जिसमें अब तक अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं।
समझौते के मुताबिक, कंपनी 2027 में 3 बिलियन डॉलर और बाकी रकम 2028 में देगी। जानकारी के मुताबिक, अगर ज्यादा लोग इस समझौते में शामिल होते हैं तो मुआवजे की कुल रकम 7 बिलियन डॉलर तक भी बढ़ सकती है। इससे पहले, कंपनी ने केस से बचने के लिए खुद को दिवालिया घोषित करने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने उसकी यह दलील खारिज कर दी थी। इन गंभीर आरोपों के बाद, कंपनी ने 2020 में अमेरिका में टैल्क-आधारित बेबी पाउडर की बिक्री बंद कर दी थी। अब जॉनसन एंड जॉनसन अमेरिका में कॉर्नस्टार्च (मकई का आटा) से बने पाउडर बेचती है।
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