
बिजनेस डेस्कः अमेरिका जैसे मजबूत देश में भी महंगाई लगातार बढ़ रही है। जून 1981 के बाद से महंगाई सबसे तेज सालाना दर से बढ़ी है। वहां महंगाई 41 साल के रिकॉर्ड स्तर पर है। गैस, किराया, खाने के सामानों के दाम बढ़ने से ऐसा हुआ है। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। जून में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 9.1% की तेजी से बढ़ा है, जो पिछले साल की तुलना में कहीं ज्यादा है। मई में सीपीआई 8.6% बढ़ी थी। महीने में इसके बढ़ने की गति 1.3% है।
अमेरिका में क्या हैं हालात
क्या है अमेरिका में बढ़ती महंगाई की वजह
जानकारों के मुताबिक महंगाई बढ़ने के अमूमन दो कारण होते हैं। सप्लाई कम होना या डिमांड का बढ़ जाना। लेकिन अमेरिका में महंगाई बढ़ने के इनके अलावा भी कई कारण बताए जा रहे हैं। व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि कीमतों के बढ़ने का कारण रूस-यूक्रेन जंग है। यह भी देखने की बात है कि उस हमले से पहले फरवरी में ही महंगाई बढ़नी शुरू हो गई थी। महंगाई पर थोड़ी लगाम लग सके, इसको लेकर जो बाइडेन ने गैस स्टेशनों को कीमतों में कटौती लाने का आह्वान किया है।
अमेरिका में डिमांड-सप्लाई गैप
अमेरिका में बढ़ रही महंगाई का दूसरा कारण डिमांड और सप्लाई में गैप का होना है। दरअसल, अमेरिका में तेजी से वैक्सीनेशन हुई है। इस वजह से इकोनॉमी में तेजी से सुधार हुआ। इसी सुधार की वजह से डिमांड काफी बढ़ गई है। लेकिन सरकार के पैकेज वगैरह से उपभोक्ताओं को राहत मिली। कोरोना में जिन लोगों की नौकरी गई, उन्हें भी इस पैकेज ने काफी मदद की। इन कारणों से मार्केट में डिमांड बढ़ गई। इकोनॉमी सुधरा तो डिमांड बढ़ी लेकिन सप्लाई का स्तर नहीं बढ़ सका। अब सप्लाई नहीं हुई तो डिमांड और सप्लाई में गैप बन गया, जिस कारण महंगाी बड़ गई।
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