
Gas Cylinder Price News: रसोई गैस सिलेंडर के बढ़ते खर्च से परेशान लोगों के लिए आने वाले महीनों में राहत की उम्मीद बनती दिख रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और ग्लोबल सप्लाई की स्थिति सुधरने के संकेत मिले हैं। ऐसे में LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जिसका फायदा आगे चलकर भारतीय उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है। हालांकि, सिलेंडर सस्ता होने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन रिपोर्ट में सामने आए संकेतों ने करोड़ों लोगों की उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं।
पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव का असर दुनियाभर के ऊर्जा बाजारों पर पड़ा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। पहले भारत की LPG जरूरत का करीब 90% हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों से आता था, लेकिन हालात बिगड़ने के बाद भारत ने अपनी रणनीति बदली और कई नए देशों से गैस खरीदना शुरू कर दिया। अमेरिका, ईरान, अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों से LPG आयात बढ़ाया गया ताकि देश में सप्लाई प्रभावित न हो।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ही महीनों में अमेरिका भारत के लिए LPG का एक बड़ा सप्लायर बनकर उभरा। फरवरी में जहां भारत के LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी काफी कम थी, वहीं अप्रैल तक यह करीब एक-तिहाई तक पहुंच गई। इस कदम से भारत को सप्लाई संकट से बचने में मदद मिली और घरेलू बाजार में बड़ी कमी नहीं आने दी गई।
नए देशों से LPG खरीदने का फायदा तो मिला, लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। क्योंकि गैस अब दूर-दराज के देशों से आ रही थी, इसलिए माल ढुलाई खर्च बढ़ गया, शिपिंग लागत बढ़ी और सप्लाई चेन महंगी हो गई। यही वजह रही कि LPG खरीदने की कुल लागत में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली।
रिपोर्ट बताती है कि कीमतों और बाजार की अनिश्चितता का असर मांग पर भी पड़ा। फरवरी में जहां LPG की मांग लगभग 3.2 मिलियन टन थी, वहीं अप्रैल तक यह घटकर 2.47 मिलियन टन रह गई। खासकर होटल, रेस्टोरेंट, छोटे उद्यो और कमर्शियल उपभोक्ताओं ने ज्यादा महंगी LPG के कारण खपत कम कर दी।
दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें काफी बढ़ीं, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका पूरा बोझ नहीं डाला गया। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत में सीमित बढ़ोतरी हुई, जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में काफी ज्यादा उछाल देखा गया यानी आम परिवारों को पूरी तरह से महंगाई का झटका नहीं झेलना पड़ा।
घरेलू सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति घरेलू सिलेंडर सैकड़ों रुपए तक का घाटा हुआ। मार्च से मई के बीच कुल नुकसान हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच गया, यानी उपभोक्ताओं को राहत देने की कीमत कंपनियों ने चुकाई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और प्रमुख व्यापारिक रास्तों के सामान्य होने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो वैश्विक LPG कीमतों में नरमी आ सकती है, माल ढुलाई खर्च कम हो सकता है, आयात लागत घट सकती है और घरेलू बाजार पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह ग्लोबल हालात और ऊर्जा बाजार की दिशा पर निर्भर करेगा।
राहत की उम्मीद जरूर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। भारत अभी भी LPG के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तनाव, शिपिंग लागत, वैश्विक ऊर्जा कीमतें और सप्लाई चेन में रुकावट, भविष्य में फिर से कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल देश में LPG सप्लाई को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। भारत ने सप्लाई के स्रोत बढ़ाकर जोखिम कम करने की कोशिश की है। अगर वैश्विक हालात सामान्य रहते हैं, तो आने वाले महीनों में गैस सिलेंडर की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। यानी अभी राहत की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल तय करेगी।
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