
नई दिल्ली: सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है, ऐसे में लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी आठवें वेतन आयोग को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं। माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाएंगी। लेकिन, सैलरी में बदलाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। केंद्र के वित्त मंत्रालय ने आठवें वेतन आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया है। इसके हिसाब से रिपोर्ट 2027 के मध्य तक ही पूरी तरह से तैयार हो पाएगी। कानूनी प्रक्रियाओं और रिपोर्ट जमा करने में देरी के चलते, बढ़ी हुई सैलरी हाथ में आने में 2026-27 का वित्तीय वर्ष लग सकता है। पिछले आयोगों के समय भी ऐसी ही देरी हुई थी।
मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए, एक्सपर्ट्स का मानना है कि सैलरी में 20 से 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच रहने की संभावना है। छठे वेतन आयोग में औसतन 40 प्रतिशत और सातवें आयोग में 23 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।
आखिरी फैसला महंगाई, सरकार की वित्तीय स्थिति और 16वें वित्त आयोग के बाद टैक्स से होने वाली कमाई जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखकर किया जाएगा। आर्थिक जानकारों का मानना है कि सरकार भत्तों और डीए में बदलाव को लेकर एक संतुलित तरीका अपना सकती है, ताकि कर्मचारियों को फायदा हो।
कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर (बकाया राशि) भी मिलेगा। लेकिन, बढ़ी हुई सैलरी को बैंक खातों तक पहुंचने में महीनों का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। आयोग की रिपोर्ट जमा होने के बाद जैसे ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से आखिरी मंजूरी मिलेगी, इस मामले में और ज्यादा स्पष्टता आ जाएगी।
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