
बिजनेस डेस्क. महिलाएं अब तेजी फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट हो रही हैं। लेकिन हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 80% महिलाओं में फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी हैं। यानी की महिलाओं की आबादी का बड़े हिस्से को पैसे इन्वेस्ट करने और टैक्स बचाने में चुक जाती हैं। महिलाओं को इन मामलों में जानकारी होना जरूरी हैं। पहले महिलाओं के लिए अलग टैक्स स्लैब था, जिसमें उन्हें छूट मिलती थी। लेकिन अब इसमें कोई रियायत नहीं मिलती है।
आईए जानते है उन स्कीमों के बारे में, जिनमें इन्वेस्ट करके महिलाएं बेहतर रिटर्न प्राप्त कर सकती है। साथ ही टैक्स में भी छूट मिल सकती हैं।
महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट
सरकार ने महिला सम्मान बचत पत्र योजना लॉन्च की है। इसमें व्यवसायी महिलाओं से लेकर नाबालिग लड़किया भी अपने पैरेंट्स की मदद इन्वेस्टमेंट कर सकती हैं। इसमें 1 हजार रुपए से लेकर 2 लाख रुपए तक जमा कर सकती हैं। इस योजना में आपको 7.5% का ब्याज मिलता है। हालांकि इस योजना में टैक्स में छूट नहीं मिलती लेकिन योजना में मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं लगता हैं। इस स्कीम का फायदा सिर्फ मार्च 2025 तक ही उठा सकती हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना
पालक अपनी बेटी की उम्र 10 पूरी होने से पहले सुकन्या समृद्धि योजना के तहत बैंक में खाता खुलवा सकते है। एक परिवार में सिर्फ दो बेटियों का अकाउंट खुलवा सकते है। इस खाते में अधिकतम 15 साल तक खाते में निवेश कर सकते है। अगर कोई पेरेंट्स बेटी के जन्म के तुरंत बाद इस योजना के तहत खाता खुलवाता है, तो वह 15 साल तक छोटी-छोटी रकम जमा करवा सकते है। इसके बाद 6 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इस लॉक-इन पीरियड में पैसे जमा नहीं कर सकते है, लेकिन ब्याज मिलता रहता है। बेटी की उम्र 18 साल होने पर मैच्योरिटी की रकम का 50% पैसे निकाल सकते है। बची हुई रकम बेटी के 21 साल की उम्र पूरी होने के बाद निकाल सकते है। आपको इस स्कीम में इनकम टैक्स धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की छूट मिलती है।
एलआईसी की आधारशिला पॉलिसी
एलआईसी की आधारशिला पॉलिसी भी महिलाओं के लिए खास योजना है। यह नॉन-लिंक्ड पर्सनल लाइफ इंश्योरेंस स्कीम है। इसमें 8 साल बच्ची से लेकर 55 साल की महिला को LIC के इस प्लान में इन्वेस्ट कर सकते हैं। इसमें टाइम पीरियड कम से कम 10 साल और ज्यादा से ज्यादा 20 साल का समय होता है। मैच्योरिटी के बाद इसमें फिक्स्ड अमाउंट मिलता है। अगर इन्वेस्टर की मौत हो जाती है, तो उनके परिवार को आर्थिक मदद मिलती है। इस स्थिति में कम से कम 75,000 रुपए वहीं, ज्यादा से ज्यादा 3 लाख रुपए तक मिल सकते हैं।
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