CBI ने JNPT और Tata Consulting Engineers के पूर्व अधिकारियों पर 800 करोड़ की ड्रेजिंग घोटाले में केस दर्ज किया

Published : Jun 21, 2025, 04:30 PM IST
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सार

CBI registers FIR against ex-officials of JNPT and TCE in ₹800 crore Capital Dredging Scam. मुंबई और चेन्नई में छापे, डिजिटल डिवाइसेज़ और इन्वेस्टमेंट डॉक्युमेंट्स जब्त। जानिए पूरी जांच की डिटेल्स।

CBI JNPT Tata Scam: सीबीआई (CBI) ने मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) के पूर्व अधिकारियों सहित दो विदेशी ड्रेजिंग कंपनियों पर 800 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले (Dredging Scam) के मामले में केस दर्ज किया है। यह मामला नेविगेशनल चैनल (Navigational Channel) को गहरा और चौड़ा करने के लिए 2003 में शुरू हुए Capital Dredging Project से जुड़ा है।

FIR में नामजद हुए कई बड़े नाम

CBI की FIR में JNPT के तत्कालीन चीफ इंजीनियर सुनील कुमार मडाभावी, TCE के तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवदत्त बोस, Boskalis Smit India LLP, Jan De Nul Dredging India Pvt Ltd और अन्य अज्ञात सरकारी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इन सभी पर IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत केस दर्ज किया गया है।

मुंबई और चेन्नई में रेड, डिजिटल सबूत जब्त

FIR दर्ज होने के बाद CBI ने बुधवार को मुंबई और चेन्नई में पांच स्थानों पर छापेमारी की। इनमें सुनील मडाभावी और देवदत्त बोस के आवास और निजी कंपनियों के कार्यालय शामिल थे। CBI प्रवक्ता के मुताबिक, छापों में कैपिटल ड्रेजिंग प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइसेज़ और संबंधित सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा किए गए निवेश के सबूत जब्त किए गए हैं।

कैसे हुआ घोटाला: टेंडर प्रक्रिया में तोड़फोड़ और अनुमान में हेरफेर

FIR में आरोप है कि TCE और JNPT के अधिकारियों ने बोली प्रक्रिया (Bidding Process) में हेरफेर की, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रतिस्पर्धा को दबा दिया गया। अनुमानित लागत को जानबूझकर असाधारण रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट को दबा दिया गया।

TCE को न सिर्फ ड्रेजिंग प्रोजेक्ट की फाइनल रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी, बल्कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी और टेंडर दस्तावेज तैयार करने और सुपरविजन का भी काम सौंपा गया था।

2003 से 2019 तक फैला घोटाला

CBI के अनुसार यह घोटाला दो चरणों में हुआ। पहला चरण 2003 से 2014 तक का रहा तो दूसरा चरण 2013 से 2019 तक रहा। इन दोनों चरणों में सरकारी धन का भारी दुरुपयोग और निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान (Loss to Exchequer) हुआ।

अभी नहीं आया कंपनियों का जवाब

FIR में नामजद कंपनियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इस केस को लेकर मुंबई बंदरगाह और JNPT के अंदर खलबली मची हुई है।

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