
Trump Tariff Impact: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 2 अप्रैल को तमाम देशों पर लगाए गए टैरिफ का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों में दिख रहा है। इससे भारतीय स्टॉक मार्केट भी अछूते नहीं हैं। सोमवार 7 अप्रैल को BSE-सेंसेक्स 3000 प्वाइंट, जबकि NSE-निफ्टी 917 अंक टूट गया है। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और इन्फोसिस के शेयर 10% तक टूट गए हैं। जानते हैं ट्रम्प के टैरिफ के 4 सबसे बड़े खतरे जिनसे पूरी दुनिया के बाजार सहमे हैं।
अमेरिका द्वारा चीन पर टैरिफ लगाने के बाद चीन ने भी उस पर 34% का टैरिफ लगा दिया है। इससे दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों के बीच टैरिफ वॉर का खतरा बढ़ गया है। इसका सीधा असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
टैरिफ पर अमेरिकी राष्ट्रपति की जिद पूरी दुनिया को भारी पड़ सकती है। ट्रंप टैरिफ से जरा भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को रेसिप्रोकल टैरिफ को 'दवा' बताया है। उन्होंने कहा-कई बार मर्ज ठीक करने के लिए आपको कुछ कड़वी दवाएं खानी पड़ती हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि वे ग्लोबल शेयर मार्केट में होने वाली गिरावट से वो बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं।
Trump के टैरिफ से दुनियाभर में मंदी का खतरा मंडराने लगा है। ने दुनिया के 180 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाने के चलते बाजारों में पैनिक क्रिएट हो गया है। इससे न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में मंदी आ सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैरिफ के असर से वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारतीय बाजारों में और गिरावट आ सकती है।
ट्रंप के टैरिफ की वजह से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका भी है। इसके साथ ही कॉर्पोरेट बेनेफिट्स होंगे, जिसका सीधा असर कंज्यूमर सेंटिमेंट पर असर दिखेगा। इसका प्रभाव कहीं न कहीं इकोनॉमिक ग्रोथ पर भी देखने को मिलेगा। जो सीधे तौर पर इकोनॉमिक ग्रोथ पर अपना प्रभाव दिखाएगा। ग्लोबल ट्रेड वॉर के चलते इकोनॉमी पर गंभीर असर पड़ेगा। जेपी मॉर्गन ने ग्लोबल रिसेशन की आशंका को 40% के पूर्वानुमान से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है।
दुनियाभर के बाजारों में गिरावट की आशंका के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक इन्वेस्टमेंट से बच रहे हैं। इसके साथ ही वो बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार 4 अप्रैल तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 13,730 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की। विदेशी निवेशकों में डर के चलते बाजारों में अभी और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
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