
नई दिल्ली। भारत में भले ही बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, लेकिन दुनिया में एक देश ऐसा भी है जहां काम करने के लिए कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। ये देश कोई और नहीं बल्कि जर्मनी है। जर्मनी जैसे विकसित देश को 4 लाख स्किल्ड वर्कर्स की जरूरत है।
क्यों नहीं मिल रहे काम करने वाले लोग?
दरअसल, जर्मनी उम्रदराज लोगों की जनसंख्या काफी ज्यादा हो गई है। इसके चलते यहां युवा आबादी और खासकर काम करने वाले लोगों की भारी कमी है। यही वजह है कि जर्मनी जैसा विकसित देश स्किल्ड कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है।
भारतीयों को दिया एक बड़ा ऑफर :
कुशल कर्मचारियों कमी से जूझ रहे जर्मनी ने कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए भारतीयों को ऑफर दिया है। मुंबई में जर्मनी के महावाणिज्यदूत अचिम फैबिग के मुताबिक, जर्मनी को नर्सेज, इलेक्ट्रीशियन, सोलर यूटिलिटी टेक्नीशियन जैसे फील्ड में कुशल कर्मचारियों की जरूरत है। फैबिग के मुताबिक, भारत में जर्मनी का एक तिहाई निवेश महाराष्ट्र में आता है। इस राज्य में जर्मनी की 800 कंपनियों में से 300 कंपनियां काम कर रही हैं।
जर्मनी और भारत दोनों का फायदा :
फैबिग का कहना है कि अगर भारत चाहे तो यहां मौजूद बड़ी युवा आबादी से जर्मनी की स्किल्ड वर्कर्स की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। इससे जहां जर्मनी को फायदा होगा, वहीं भारत के युवाओं को भी रोजगार मिल सकेगा। फैबिग के मुताबिक, करीब 35 हजार भारतीय छात्र जर्मनी में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा कई टेक्निकल एक्सपर्ट जर्मनी में आईटी प्रोफेशनल के तौर पर काम कर रहे हैं।
जर्मनी की औसत युवा आयु सीमा 28 साल :
फैबिग के मुताबिक, विकसित देश जर्मनी की आबादी करीब 8 करोड़ है। वहीं, भारत में अकेले महाराष्ट्र की जनसंख्या 12 करोड़ से ज्यादा है। हालांकि, भारत की औसत युवा आयु सीमा 28 वर्ष है, जबकि इसकी तुलना में जर्मनी की 48 साल है। फैबिग ने महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस को बताया कि जर्मनी का फुटबॉल क्लब, बार्यन म्यूनिख भारत में फुटबॉल ट्रेनिंग कैम्प और टूर्नामेंट आयोजित करना चाहता है।
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