
रिज़र्व बैंक या अन्य नियामक एजेंसियों की अनुमति के बिना लोन देने और किसी भी तरह का वित्तीय लेनदेन करने को गैर-जमानती अपराध मानते हुए जुर्माना लगाने के प्रस्ताव के साथ केंद्र सरकार ने एक मसौदा विधेयक पेश किया है। इस विधेयक का नाम 'अनियमित लोन पर प्रतिबंध' है। इससे गैरकानूनी लोन ऐप्स पर लगाम लगेगी। बिना अनुमति लोन देने वालों को दस साल तक की जेल हो सकती है। इस कानून का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और अनियमित लोन देने वालों पर रोक लगाना है।
डिजिटल लोन पर RBI के वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट में अनियमित लोन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने समेत कई उपाय सुझाए गए थे। इसमें रिजर्व बैंक या अन्य नियामक संस्थाओं में पंजीकरण कराए बिना लोन देने वालों पर नियंत्रण की भी सिफारिश की गई थी। कानून का उल्लंघन कर डिजिटल या किसी अन्य तरीके से लोन देने पर कम से कम दो साल की जेल और दो लाख से एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अगर लोन देने वाले या लेने वाले की संपत्ति एक से ज़्यादा राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में है, तो मामले की जांच CBI को सौंपी जाएगी।
पिछले कुछ सालों में मोबाइल के ज़रिए लोन लेनदेन में भारी बढ़ोतरी हुई है। इन लोन पर अक्सर ऊंची ब्याज दरें और कई छिपे हुए शुल्क वसूले जाते हैं। इसके अलावा, लोन न चुका पाने पर लोगों को परेशान करने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसे देखते हुए, सितंबर 2022 से अगस्त 2023 के बीच गूगल ने 2,200 से ज़्यादा ऐसे ऐप्स प्ले स्टोर से हटा दिए हैं।
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