
नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2022 को समाप्त हुई तिमाही में विकास की रफ्तार कम हुई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 4.4 प्रतिशत तक गिर गई। पिछली तिमाही में 6.3 प्रतिशत की रफ्तार से देश की जीडीपी बढ़ी थी।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा वित्त वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) का जीडीपी ग्रोथ डेटा जारी किया गया। यह अर्थशास्त्रियों द्वारा शेयर किए गए अनुमानों से थोड़ा कम है। वित्र वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी 40.19 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2021-22 में यह 38.51 लाख करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही की तुलना में वित्त वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही में जीडीपी में 4.4 फीसदी की वृद्धि हुई।
7 प्रतिशत रह सकती है वास्तविक जीडीपी वृद्धि
डेटा ने यह भी संकेत दिया कि चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस बीच, सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2023 में नॉमिनल जीडीपी 15.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। बता दें कि कई अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही में 4.6 फीसदी की दर से जीडीपी बढ़ेगी।
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सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक विकास अपेक्षा से धीमा रहा है। वैश्विक आर्थिक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इसके चलते आर्थिक विकास धीमा होने को लेकर चिंता पैदा हो गई है। तीसरी तिमाही में कमजोर जीडीपी वृद्धि मार्च 2023 को समाप्त होने वाले पूरे वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र सरकार के जीडीपी विकास अनुमानों को भी प्रभावित कर सकती है। सरकार ने वित्त वर्ष 2023 में अर्थव्यवस्था के 7 प्रतिशत बढ़ने की भविष्यवाणी की है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक ने इसके 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।
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