
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को अंतरिम बजट (Interim Budget 2024) पेश किया। बजट में रक्षा मंत्रालय को 6.2 लाख करोड़ रुपए का फंड दिया गया है। पिछले साल रक्षा बजट 5.94 लाख करोड़ रुपए का था। इस तरह देखें तो 4.3 फीसदी की वृद्धि हुई है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र को लेकर एक नई योजना की घोषणा की है। इसके तहत डीपटेक (DeepTech) टेक्नोलॉजी को मजबूत किया जाएगा और सेनाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास में तेजी लाई जाएगी।
क्या है डीपटेक टेक्नोलॉजी?
डीपटेक टेक्नोलॉजी का मतलब ऐसी अत्याधुनिक वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग प्रगति से है जिनमें AI (Artificial Intelligence), ML (Machine Learning) और अन्य अभूतपूर्व इनोवेशन शामिल होते हैं। इसमें AI, ML, रोबोटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी, बायो टेक्नोलॉजी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। जटिल समस्याओं को हल करने के लिए वर्तमान में जो संभव है उसकी सीमाओं से आगे बढ़ने पर डीपटेक केंद्रित है।
डीपटेक गहरे वैज्ञानिक सिद्धांतों और जटिल तकनीकी ज्ञान पर निर्भर है। इन तकनीकों में अक्सर पर्याप्त रिसर्च एंड डेवलपमेंट के प्रयास करने होते हैं। इससे ऐसी चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है जिन्हें दुर्गम माना जाता है।
रक्षा क्षेत्र में भारत को क्यों है डीपटेक की जरूरत?
जंग का मैदान अब आधुनिक हो गया है। अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी हथियारों के लिए जरूरी है। इसके चलते डीपटेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर हथियारों को विकसित किया जा रहा है। भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है। इसके चलते भारत को डीपटेक के मामले में भी आगे बढ़ने की जरूरत है।
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आज आधुनिक सेनाएं AI और ML का इस्तेमाल कर रहीं हैं। AI की क्षमता से लैस मिसाइल इस्तेमाल किए जा रहे हैं। AI की क्षमता वाले लड़ाकू विमान विकसित किए जा रहे हैं। दुनियाभर की सेना में रोबोट का इस्तेमाल बढ़ रहा है। दुनिया की कुछ सबसे तकनीकी रूप से उन्नत सेनाएं पहले से ही डीपटेक टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही हैं।
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