
आज से कुछ साल पहले तक लोन लेने के लिए बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों के चक्कर काटने पड़ते थे. लेकिन अब स्थिति उलट है. लोन देने के लिए वित्तीय संस्थानों के फ़ोन कॉल्स न आने वाले लोगों की संख्या कम ही होगी. आकर्षक ब्याज दरें और दूसरे शानदार ऑफर्स के साथ लोन देने वाले संस्थान लुभाते हैं. लोन देने वाले को पता होता है कि लोन की रकम कैसे वसूलनी है. लेकिन लोन लेने वाला शायद यह भी नहीं देखता कि वो EMI भर पाएगा या नहीं. और फिर यही लोन उसकी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ देता है.
लोन लेने से पहले जानने योग्य दो बातें
1. लोन की रकम से ज़्यादा चुकाना पड़ता है, क्योंकि लोन पर ब्याज लगता है. इसके अलावा दूसरे दस्तावेज़ों के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं.
2. लोन देने वाला ब्याज पहले ही काट लेता है, यानी शुरुआती EMI ब्याज में ही चली जाती है. ब्याज पूरा चुकाने के बाद ही मूलधन की EMI शुरू होती है.
लोन लेने वालों को क्या नहीं करना चाहिए
1. कितनी EMI भर सकते हैं, यह देखकर ही लोन लें. नहीं तो आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है.
2. ऐशो-आराम के लिए लोन लेने से बचें.
3. अगर लोन चुकाने की क्षमता नहीं है, तो यह न सिर्फ़ महंगा होता है, बल्कि लोन लेने और देने वाले दोनों के लिए जोखिम भरा भी. पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन इसी श्रेणी में आते हैं.
क्या लोन लेना गलत है?
बिल्कुल नहीं. कई लोगों के लिए होम लोन के बिना अपना घर बनाना भी मुश्किल होता है. हमारे घर के कई उपकरण और गाड़ियां भी लोन से ही खरीदी जाती हैं. लोन लेने के बाद अगर उसे चुकाने के लिए अपनी क्षमता से ज़्यादा खर्च करना पड़े, तो यह खतरनाक हो जाता है. याद रखें, कोई भी लोन मुफ्त नहीं देता.
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