
वाशिंगटन। अमेरिका में मेड-इन-इंडिया सामान धीरे-धीरे मेड-इन-चाइना की जगह ले रहे हैं। 2018 से 2022 के बीच चीन से अमेरिका द्वारा आयात किए जाने वाले सामानों में 10 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, इसी दौरान आयात भारत से 44 फीसदी, मैक्सिको से 18 फीसदी और ASEAN (Association of Southeast Asian Nations) के 10 अन्य देशों से 65 फीसदी बढ़ गया है। हाल ही में बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप द्वारा किए गए एक स्टडी में यह जानकारी मिली है।
कोरोना महामारी के दौरान ग्लोबल सप्लाई चेन को नुकसान हुआ था। इसके बाद दुनिया ने चीन की जगह दूसरे देशों से सामान मंगाने की ओर ध्यान दिया। इसका सीधा लाभ भारत को हो रहा है। भारत मैन्युफैक्चरिंग सोर्सिंग और आपूर्ति श्रृंखला में वैश्विक बदलावों से लाभ उठा रहा है।
ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में बड़े प्लेयर के रूप में उभरा भारत
अमेरिका चीन से यांत्रिक मशीनरी का आयात 2018 से 2022 तक 28% कम कर रहा है। वहीं, मेक्सिको से 21%, आसियान से 61% और भारत से 70% बढ़ गया है। पिछले पांच साल में भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में बड़े प्लेयर के रूप में उभरा है। भारत से अमेरिका को निर्यात में 23 बिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है।
भारत में बने प्रोडक्ट पसंद कर रहे अमेरिकी
अमेरिकी लोग भारत में बने प्रोडक्ट पसंद कर रहे हैं। अमेरिका का सबसे बड़ा रिटेलर वॉलमार्ट भारत से अपनी सोर्सिंग बढ़ा रहा है। अमेरिका में उसके स्टोर मेड-इन-इंडिया टैग के साथ अधिक उत्पाद बेच रहे हैं। वॉलमार्ट का लक्ष्य उन कैटेगरी में सोर्सिंग करना है जहां भारत के पास विशेषज्ञता है। इसमें फूड, इस्तेमाल किए जाने वाले सामान, हेल्थ एंड वेलनेस, कपड़े, जूते, घरेलू वस्त्र और खिलौने शामिल हैं। वॉलमार्ट के कार्यकारी उपाध्यक्ष (सोर्सिंग) एंड्रिया अलब्राइट ने बताया है कि वे 2027 तक हर साल भारत से 10 अरब डॉलर का माल मंगाने के अपने लक्ष्य तक पहुंचने की राह पर है। कंपनी के अनुसार, भारत पहले से ही लगभग 3 अरब डॉलर के वार्षिक निर्यात के साथ दुनिया के सबसे बड़े खुदरा विक्रेता के लिए शीर्ष सोर्सिंग बाजारों में से एक है।
भारत अधिक आकर्षक क्यों है?
भारत में सामान बनाने में आने वाली लागत कम है। बीसीजी की गणना के अनुसार, अमेरिका में भारत से आयात होने वाले सामान की औसत लागत अमेरिका में बनाए जाने वाले सामान की तुलना में 15% कम है। इसके विपरीत चीन से अमेरिका में आयात किए जाने वाले की औसत लागत सिर्फ चार फीसदी कम है। अमेरिका ने चीन के सामानों पर 21 फीसदी से अधिक टैक्स लगाया है, जिससे उनकी कीमत बढ़ गई है।
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