BRICS : ईंट जैसी मजबूत इकोनॉमी, 5 पावरफुल देशों का संगठन, जानें क्या है ब्रिक्स

Published : Oct 22, 2024, 10:46 AM IST
BRICS

सार

प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स समिट में शामिल होने रूस रवाना हो गए हैं। जहां कजान शहर में उनकी मुलाकात चीन, रूस, ब्राजील और साउथ अफ्रीका के प्रमुखों से होगी। यह संगठन दुनिया के सबसे तेज बढ़ती इकोनॉमी वाले देशों की है।

BRICS 2024 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स (BRICS) समिट में शामिल होने रूस (Russia) के लिए रवाना हो गए हैं। अपने दो दिवसीय दौरे पर पीएम कजान (Kazan) शहर में हो रही ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेंगे और सदस्यों देशों के प्रमुख से भी मिलेंगे। जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) भी शामिल हैं। यह ब्रिक्स का 16वां शिखर सम्मेलन है। इसमें दुनिया के 5 आर्थिक ताकतवर देश हैं, जिनकी इकोनॉमी ईंट जैसी मजबूत है। ऐसे में आइए जानते हैं ब्रिक्स के बारें में...

BRICS क्या है

रूस के पूर्व प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव की अगुवाई में 1990 के दशक में रूस, भारत और चीन (RIC) ने एक संगठन बनाया। जिसका मकसद दुनिया की विदेश नीति (Foreign Policy) में अमेरिकी दबदबे को कम कर आपसी संबंधों को मजबूत बनाना था। साल 2001 में इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने ब्राजील और इन तीनों देशों को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती इकोनॉमी बताकर दुनिया का ध्यान इसकी ओर खींचा। 2009 में ब्राजील भी इस संगठ का हिस्सा बना और यह BRIC (ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन) नाम से जाना गया। इसके एक साल बाद 2010 में साउथ अफ्रीका भी इस संगठन में शामिल हो गया, जिससे पूरा नाम BRICS (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका) पड़ गया।

ब्रिक्स का मतलब क्या है

2000 दशक में ब्राजील, रूस, भारत और चीन दुनिया में सबसे तेजी से आर्थिक विकास करने वाले देश थे। इनकी आर्थिक मजबूती के चलते ही ब्रिक (BRIC) यानी ईंट कहा गया। 2001 में ब्रिटिश इकोनॉमिस्ट और गोल्डमैन सैक्स सदस्य Jim O'Neill ने ये नाम दिया था। साउथ अफ्रीका के बाद इसका नाम BRICS हुआ, मतलब ईंट जैसी मजबूत इकोनॉमी वाले देशों का संगठन।

क्या अमेरिका-ब्रिटेन जैसे देशों से मजबूत ब्रिक्स के सदस्य

ब्रिक्स EU (European Union) को पीछे छोड़कर आज दुनिया का तीसरा सबसे ताकतवर आर्थिक संगठन है। 2008-2009 में पश्चिमी देशों में आई आर्थिक मंदी का भी ब्रिक्स के देशों पर असर नहीं पड़ा था। इन देशों में पश्चिमी देशों को टक्कर देने की ताकत है। आज पश्चिमी देशों की दुनिया की इकोनॉमी कंट्रोल करने की ताकत भी इसी संगठन के चलते कम हुई है।

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