
इस महीने होने वाली समीक्षा बैठक में रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा, ऐसा संकेत मिल रहा है। पहले उम्मीद थी कि दिसंबर की समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कमी की जाएगी। लेकिन एचडीएफसी बैंक की रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा हालात में रेपो रेट 6.5% पर ही बना रहने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फरवरी में होने वाली RBI की समीक्षा बैठक में ही ब्याज दरों में किसी तरह के बदलाव की संभावना है। देश का सकल घरेलू उत्पाद अनुमान से काफी कम रहने की स्थिति में अगले हफ्ते रिजर्व बैंक की नई ऋण नीति की बैठक हो रही है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद घटकर 5.4% रह गया है। पहली तिमाही में जीडीपी 6.7% थी।
एचडीएफसी ने शहरी क्षेत्रों में मांग में कमी को मुख्य समस्या बताया है। असुरक्षित ऋणों के वितरण में कमी का भी उपभोग पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड लोन जैसे असुरक्षित ऋणों में गिरावट आई है। वहीं, एचडीएफसी बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में मांग वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बढ़ेगी। कृषि क्षेत्र में सुधार और सरकारी योजनाओं के जरिए धन का वितरण ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी का कारण है।
देश की विकास दर में तेजी लाने के लिए रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए, यह मांग वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले दिनों की थी। इसके तुरंत बाद रिजर्व बैंक गवर्नर ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति ही ब्याज दरों में कटौती का निर्णायक कारक है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि गलत समय पर दरों में कटौती का कोई भी कदम 'बहुत खतरनाक' होगा।
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