
Amazon as payment Aggregator: ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनी अमेज़न को भारत में पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में मान्यता मिल गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अमेज़न के पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस को अप्रूव कर दिया है। पूर्व में अमेज़न पेमेंट ऐप का लाइसेंस लेकर काम कर रहा था। 20 फरवरी को रिजर्व बैंक ने अमेज़न को पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में मान्यता देते हुए उसे काम करने का परमिशन ग्रांट कर दिया। अमेज़न अपने प्लेटफार्म के माध्यम से ई-कॉमर्स लेनदेन की सुविधा दे सकता है। इस साल 10 कंपनियों को पेमेंट एग्रीगेटर का लाइसेंस अप्रूव हुआ है।
दरअसल, पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम करने वाले प्लेटफार्म विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियों या सर्विसेस के लिए ग्राहकों से संबंधित व्यापारियों के लिए पेमेंट एकत्र करता है और एक तय सीमा के भीतर उन तक मनी ट्रांसफर करता है। यानी अगर आप किसी ई-कॉमर्स साइट से कोई प्रीपेड या पोस्टपेड पेमेंट कर कोई सामान लेते हैं तो संबंधित पेमेंट एग्रीगेटर के पास वह पेमेंट जाता है। उसे वह निर्धारित समयसीमा के भीतर व्यापारी को ट्रांसफर करता है।
हम जीवन को और आसान बनाएंगे: अमेज़न
अमेज़न पे के प्रवक्ता ने कहा: हम जीवन को सरल बनाने और व्यापारियों और ग्राहकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह लाइसेंस हमें अपने डिस्ट्रिब्यूशन चैनलों को और मजबूत करने और भारत भर में हमारे व्यापारियों और ग्राहकों के लिए अभिनव समाधान प्रदान करने की अनुमति देता है जो उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और पुरस्कृत डिजिटल भुगतान अनुभव प्रदान करता है।
कंपनी के पास प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स लाइसेंस
अमेज़न पे के पास पहले से ही प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआई) लाइसेंस है। यह उसे अमेज़ॅन पे बैलेंस मनी जैसी वॉलेट सर्विस प्रदान करने की अनुमति देता है।
दस कंपनियों को इस साल मिला एग्रीगेटर लाइसेंस
इस साल 2024 की शुरुआत से अभी तक आरबीआई ने दस कंपनियों को पेमेंट एग्रीगेटर का लाइसेंस अप्रूव किया है। लाइसेंस प्राप्त करने वाली कंपनियों में फूड एग्रीगेटर जोमैटो, जस्पे, डिसेंट्रो, एम-स्वाइप, ज़ोहो, स्ट्राइप आदि शामिल है।
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