
Salary vs Benefits for Indian Professionals: अपने कर्मचारियों को खुश रखने के लिए भारतीय कंपनियां सैलरी के अलावा तमाम तरह की सुविधाएं देती हैं। इनमें वेलनेस अलाउंस, टीम आउटिंग, मुफ्त भोजन और छुट्टियों जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इतना ही नहीं, कंपनिया टैलेंट को अट्रैक्ट करने और उन्हें अपने साथ जोड़े रखने के लिए समय-समय पर तमाम तरह के नए-नए पर्क्स एंड अलाउंस भी दे रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब बात ज्यादा सैलरी और बेहतर सुविधाओं में से किसी एक को चुनने की आती है, तो इंडियन प्रोफेशनल्स दोनों में से किसे ज्यादा प्रियारिटी देते हैं? लिंक्डइन के एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है।
लिंक्डइन के वर्कफोर्स कॉन्फिडेंस इंडेक्स के अनुसार, इंडियन प्रोफेशनल्स नौकरी के दौरान दूसरे तरह के फायदों की तुलना में सैलरी को प्राथमिकता देते हैं। एक सर्वे से पता चलता है कि 50% लोग वेतन में कटौती को कतई एक्सेप्ट नहीं करते हैं। चाहे फिर काम का बोझ कम हो या भले ही टीम में बेहतर तालमेल हो, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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लिंक्डइन के सर्वे से पता चलता है कि 10 में से 5 भारतीय कर्मचारी किसी भी लाभ के लिए वेतन में कटौती को तैयार नहीं हैं। 54% प्रोफेशनल्स के लिए, रीजनेब वर्कलोड होना भी उनकी सैलरी को कम करने के लिए पर्याप्त इंसेटिव नहीं था। इसी तरह, 52% लोगों ने कहा कि अपने बॉस या टीम के साथ बेहतर रिश्ते का मतलब ये कतई नहीं है कि वो कम सैलरी एक्सेप्ट कर उसमें काम करते रहेंगे। गोदरेज कैपिटल में सीएचआरओ, भव्या मिश्रा कहती हैं- "कॉम्पीटीटिव सैलरी बहुत ज्यादा मायने रखती है। लेकिन मुझे लगता है कि उद्देश्य ही आपको दूसरों से अलग करता है।" हालांकि, भव्या फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और वर्कप्लेस पर्पज के बीच बैलेंस बनाकर चलने पर जोर देती हैं।
दिलचस्प बात ये है कि सभी प्रोफेशनल्स की सोच ऐसी नहीं है। कुछ के लिए वैल्यूज हमेशा वेतन से ज्यादा प्रियारिटी पर होती हैं। आंकड़ों से पता चला है कि 36% कर्मचारी अपने व्यक्तिगत मूल्यों के अनुरूप कंपनी के लिए वेतन में कटौती करने को तैयार हैं। लगभग 33% कर्मचारी ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी और ग्रोथ अपॉर्च्युनिटीज के लिए सैलरी का त्याग करने को भी तैयार हैं। ये चीज वर्कप्लेस की प्राथमिकताओं में बढ़ते बदलाव को बताती है, जहां पर्पज, अलाइनमेंट और करियर ग्रोथ कभी-कभी पैसों से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब सिर्फ वेतन ही सौदे तय करने का एकमात्र जरिया नहीं रह गया है। क्राफ्टन इंडिया के हेड ऑफ पीपल्स ऑपरेशन, सौरभ शाह के मुताबिक, महज सैलरी ही हमेशा डील को पक्का नहीं करती। आजकल कर्मचारी काम में मीनिंग, फ्लेक्सिबिलिटी और अपनेपन की भावना चाहते हैं।
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