
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार ने आज गुरुवार को इतिहास रच दिया। निफ्टी 26,306.95 के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया, जो उसके पिछले रिकॉर्ड 26,277.35 को भी पीछे छोड़ गया। वहीं सेंसेक्स ने पहली बार 86,000 का स्तर पार करते हुए 86,026.18 तक छलांग लगाई। सुबह 10:15 बजे तक सेंसेक्स 318.71 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 85,928.22 पर था, जबकि निफ्टी 73.10 अंक या 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,278.40 पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान 1903 शेयरों में तेजी, 1377 में गिरावट और 183 शेयर बिना बदलाव के रहे। निफ्टी-50 में बाजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, एशियन पेंट्स, बाजाज फिनसर्व और एलएंडटी सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे, जिनमें करीब 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई। लेकिन सवाल कि ऐसा क्या हुआ कि मार्केट ने अचानक रिकॉर्ड तोड़ दिया? जानिए 5 बड़े कारण...
पिछले कुछ दिनों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की दिखाए जा रहे मजबूत इंट्रेस्ट ने बाजार को स्थिर सपोर्ट दिया है। बुधवार को एफआईआई ने लगभग 4,778 करोड़ रुपए की जोरदार खरीदारी की, जो मंगलवार को किए गए 785 करोड़ रुपए के निवेश के बाद लगातार दूसरा सकारात्मक दिन रहा। विदेशी निवेशकों की वापसी आमतौर पर इस बात का संकेत माना जाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई को लेकर भरोसा बढ़ रहा है।
अमेरिका की फेडरल रिजर्व की ओर से दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती किए जाने की संभावना ने मार्केट में नई जान फूंक दी है। CME FedWatch टूल के अनुसार, रेट कट की संभावना पिछले सप्ताह के 30 प्रतिशत से बढ़कर अब 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ब्याज दरों में कटौती से वैश्विक लिक्विडिटी बढ़ती है, जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत में निवेश और तेजी से प्रवेश करता है। यही वजह है कि निफ्टी ने बुधवार को पिछले पांच महीनों का सबसे अच्छा सत्र दर्ज किया और 14 महीने के उच्च स्तर पर बंद हुआ।
भारतीय बाजार आज अकेले नहीं चढ़ रहे थे, बल्कि पूरी एशियाई बाजारों में पॉजिटिविटी का माहौल था। दक्षिण कोरिया के कोस्पी से लेकर जापान के निक्केई 225, चीन के शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स तक सभी प्रमुख एशियाई इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। इसके साथ ही अमेरिकी बाजार भी बुधवार को मजबूती के साथ बंद हुए, जिससे भारतीय निवेशकों का भरोसा और बढ़ा। ग्लोबल बाजारों का यह बड़ा सपोर्ट घरेलू निवेशकों के लिए एक संकेत था कि ग्लोबल आर्थिक माहौल फिलहाल बेहतर दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 0.48 प्रतिशत गिरकर 62.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, जो भारत जैसे तेल-आयातक देश के लिए बड़ी राहत है। कच्चे तेल की सस्ती कीमतें न सिर्फ भारत के आयात बिल को कम करती हैं बल्कि फ्यूल महंगा न होने के कारण महंगाई पर भी लगाम लगाती हैं। इससे आरबीआई को भी नीतिगत दरों में आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत नहीं रहती। ऐसे में स्टॉक मार्केट को भी पॉजिटिव माहौल मिलता है, क्योंकि कंपनियों की लागत कम होती है और निवेशकों के लिए बाजार अधिक आकर्षक बनता है।
26 नवंबर को जारी IMF की लेटेस्ट रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत का 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य अब FY29 तक पूरा हो पाएगा, जो पहले FY28 का अनुमान था। हालांकि, यह टाइम लिमिट एक साल बढ़ गई है, लेकिन लॉन्ग टर्म आर्थिक विकास की संभावनाएं अब भी बेहद मजबूत मानी जा रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भले ही GDP ग्रोथ थोड़ी धीमी रही हो और रुपए में कमजोर रुझान दिखा हो, लेकिन भारत की वृद्धि का बुनियादी ट्रैक अब भी स्थिर है। यही भरोसा निवेशकों की दीर्घकालिक रणनीति को मजबूत करता है और इक्विटी मार्केट में पॉजिटिव कॉन्सेप्ट बनाता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। यहां दिए गए डेटा, विश्लेषण, मार्केट ट्रेंड या किसी भी तरह की वित्तीय जानकारी को निवेश सलाह के रूप में न लिया जाए। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
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