
इसे महंगाई की मार कहें या जेब में कम होता पैसा कि शहरी परिवारों का एक बड़ा हिस्सा अपना बजट संभालने के लिए चाय से लेकर तेल और साबुन तक सबका छोटा पैकेट खरीदने लगा है. पहले जो लोग सरसो का तेल 1 लीटर या 5 लीटर के डिब्बे में खरीदा करते थे अब 500ml या उससे छोटे पैकेट खरीदने लगे हैं.
इन्हीं पैटर्न को देखते हुए FMCG कंपनियां अपने कई तरह के प्रोडक्ट के छोटे पैकेट लॉन्च करने लगी हैं. हालांकि ये पहले भी होता था, लेकिन पहले कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों को ध्यान में रखकर ये किया करती थीं. लेकिन हालिया बदलाव शहरी ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न को देखते हुए हुआ है. छोटे पैकेट न सिर्फ सामान्य प्रोडक्ट के आ रहे हैं बल्कि कंपनियां अपने प्रीमियम उत्पादों के भी छोटे पैक लॉन्च कर रही हैं.
हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोलगेट-पामोलिव, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ITC और राडिको खेतान जैसी कंपनियों ने खाने-पीने की चीजों से लेकर घरेलू सामान और व्यक्तिगत देखभाल (Personal Care) तक के चीजों के छोटे पैकेट बाजार में ला रही हैं. अल्कोहल कंपनियां भी कम ml में अपने प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं.
कंपनियों के लिए ये रणनीति दोधारी तलवार की तरह साबित हो रही हैं. जहां छोटे पैकेट कंपनियों के सेल्स को बरकार रखने में तो मदद कर रहे हैं और वॉल्यूम भी बढ़ रहा है लेकिन किसी प्रोडक्ट को प्रीमियम बनाने की स्ट्रैटेजी को इससे बड़ा झटका लग रहा है.
पारले के वाइस प्रेसीडेंट मयंक शाह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "बीती तिमाही में उनके यहां छोटे पैक 8-9% की दर से बढ़े, जबकि बड़े पैक केवल 3% की दर से बढ़े हैं." इस रणनीति से कंपनियों को अपने प्रीमियम प्रोडक्ट के मार्जिन भी कम करने पड़ रहे हैं. जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ रहा है. हाल ही में HUL के CEO रोहित जावा ने दिसंबर तिमाही के नतीजों पर बात करते हुए कहा था कि शहरी बाजार में छोटे पैक की मांग "ट्रेंड ब्रेकर" की तरह है. इससे तिमाही के नतीजे में निगेटिव मिक्स भी देखने को मिला है.
यह भी पढ़ें
टर्म इंश्योरेंस Vs ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस : जानें दोनों में सबसे बेस्ट कौन?
व्यापार समाचार: Read latest business news in Hindi, Investment News, Insurance News, Personal Finance Tips & Budget News Live Updates at Asianet Hindi News