
Satyanarayan Nuwal Success Story: कहते हैं मेहनत के साथ किस्मत का साथ मिल जाए तो व्यक्ति को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। ऐसा ही कुछ हुआ सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया के फाउंडर सत्यनारायण नुवाल के साथ। राजस्थान के मारवाड़ी परिवार से ताल्लुक रखने वाले नुवाल कोई चांदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए, बल्कि अपने बलबूते अरबपति बने। बिजनेस की दुनिया में उनकी सफलता की कहानी लाखों-करोड़ों लोगों को प्रेरित करने वाली है।
सत्यनारायण नुवाल का जन्म राजस्थान के भीलवाड़ा में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता पटवारी, जबकि दादा एक परचूने की दुकान चलाते थे। 1971 में पिता के रिटायर होने के बाद परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। इसके चलते सत्यनारायण नुवाल महज 10वीं तक ही पढ़ाई कर पाए।
19 साल की उम्र में सत्यनारायण नुवाल की शादी हो गई, जिसके बाद उन पर और ज्यादा जिम्मेदारी बढ़ गई। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने फाउंटेन पेन की स्याही बेचने का काम शुरू किया। हालांकि, इस काम में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। कुछ समय के लिए वे अपने गुरुदेव के साथ मथुरा में रहे और छोटा-मोटा काम धंधा करते रहे। ये वो पहला मौका था, जब उन्हें एहसास हुआ कि उनकी रुचि बिजनेस की तरफ बढ़ रही है।
रोजी-रोटी की तलाश में सत्यनारायण नुवाल 1977 में महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के बल्हारशाह पहुंचे। यहां उन्हें कई रातें स्टेशन पर बितानी पड़ीं, क्योंकि तब उनके पास किराए का घर लेने तक के पैसे नहीं थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात अब्दुल सत्तार अल्लाहभाई से हुई जो कुएं खोदने, खदानों की खुदाई में काम आने वाले विस्फोटकों का धंधा करते थे। यहीं से उनके किस्मत ने करवट ली।
चूंकि उस दौर में इस तरह के विस्फोटकों की सप्लाई बहुत कम थी। ऐसे में सत्यानारायण नुवाल ने अल्लाभाई से एक डील की। उन्होंने 1000 रुपये महीना देकर उनसे गोदाम और विस्फोटकों को बेचने का लाइसेंस लेकर अपना धंधा शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में ब्रिटेन की एक फर्म इंपीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज (ICI) के अफसरों ने उन्हें देखा। इसके बाद इस कंपनी ने नुवाल को ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर बना दिया। जल्द ही कोयला खदानों में इस्तेमाल के लिए गोला-बारूद की तलाश करने वाले ग्राहकों से उनकी अच्छी कमाई होने लगी।
1984 में नुवाल नागपुर पहुंचे। यहां उन्होंने सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी वेस्टर्न कोलफील्ड्स से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कीं। डीलर 250 रुपये में 25 किलो विस्फोटक खरीदकर बाजार में 800 रुपये में बेचते थे। लेकिन जब सरकार ने ज्यादा पैसे देने शुरू कर दिए तो कॉम्पिटीशन बढ़ गया।
नुवाल ने 1995 में SBI से 60 लाख रुपये का लोन लेकर विस्फोटक निर्माण की एक छोटी यूनिट सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया शुरू की। वो अपने विस्फोटक कोल इंडिया लिमिटेड को सप्लाई करने लगे। यहां से नुवाल की अच्छी कमाई होने लगी। एक साल के भीतर उन्होंने 1 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश कर इसे छोटे प्लांट को बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग पावरहाउस बना दिया। 1996 में कंपनी को 6000 टन विस्फोटक सालाना बनाने का लाइसेंस मिला।
सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया वर्तमान में इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स ड्रोन के लिए वारहेड, हथगोले, सैन्य विस्फोटक, प्रॉपेलेंट, ग्रेनेड, रॉकेट तथा पिनाक और अग्नि जैसी मिसाइलों के लिए विस्फोटक बनाने वाली भारत की टॉप मोस्ट कंपनी बन चुकी है। वर्तमान में सोलर इंडस्ट्रीज में 7500 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं और नागपुर में इसके दो कारखाने हैं। भारत के 8 राज्यों में फैले 25 मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट के अलावा गाम्बिया, नाइजीरिया, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका, घाना, ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया में भी कंपनी ने अपने बिजनेस का विस्तार किया है। कंपनी 50 से ज्यादा देशों में अपने सामान का निर्यात करती है।
Forbes के मुताबिक, सत्यनारायण नुवाल वर्तमान में 4.3 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। फिलहाल Solar Industries India Ltd का कुल मार्केट कैप 85,843 करोड़ रुपए है। वहीं, शुक्रवार 7 मार्च 2025 को इसके शेयर की कीमत 9,470.30 रुपए है।
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