
बिजनेस डेस्क : ट्रंप के आते ही शेयर मार्केट (Share Market) मुरझा गए हैं। मंगलवार 21 जनवरी को बाजार में बड़ी गिरावट आई है। दोपहर 3 बजे तक सेंसेक्स 1200 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 75,800 के लेवल पर कारोबार कर रहा है। जबकि निफ्टी 300 अंकों से ज्यादा टूटा है। आज शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों की शुरुआत तेजी के साथ हुई लेकिन बाद में इसमें गिरावट आ गई। अचानक से पैनिक सेलिंग बढ़ गई और तेज गिरावट होने लगी। आइए जानते हैं इसके कारण...
1. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता है। शपथ लेने के तुरंत बाद ट्रंप ने पड़ोसी देशों पर ट्रेड टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद सतर्कता बढ़ गई है, जिसका असर बाजार में कारोबार पर पड़ा है। इससे निवेशकों में पैनिक सेलिं बढ़ी है। बता दें कि ट्रंप एडमिन ने 1 फरवरी 2025 से मैक्सिको और कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने की सोच रहा है। इसकी वजह से मुद्रास्फीति के दबाव, संभावित डॉलर मजबूती को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जो नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
मंगलवार को अकेले जोमैटो का सेंसेक्स की गिरावट में 170 अंकों का योगदान रहा। इसके शेयरों में 11% से ज्यादा की गिरावट आई। जोमैटो (Zomato) के दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 57% तक की गिरावट आई है। अन्य हैवीवेट जैसे रिलायंस, ICICI बैंक, HDFC बैंक और SBI ने सेंसेक्स की कुल गिरावट में संयुक्त तौर पर 311 अंकों में गिरावट लेकर आए।
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वित्तवर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही के रिजल्ट में कई कंपनियों को प्रदर्शन कमजोर रहे हैं। ब्लूमबर्ग के तीसरी तिमाही के परिणाम के अनुमान के मुताबिक, निफ्टी 50 कंपनियों के EPS में साल-दर-साल मात्र 3% की बढ़ोतरी होगी। इनक्रेड इक्विटीज के अनुसार, इनमें मेटल, केमिकल, कंज़्यूमर स्टेपल, बैंक और ऑइल एंड गैस सेक्टर्स हो सकते हैं। जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ा है।
निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 3.2% तक की गिरावट आई है। डिक्सन टेक्नोलॉजीज और एम्बर एंटरप्राइजेज इसके प्रमुख कारण रहे। डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयर तीसरी तिमाही के नतीजे आने के बाद 13% से ज्यादा गिरे हैं। ओबेरॉय रियल्टी और लोढ़ा में भी बड़ा नुकसान हुआ है, जिससे निफ्टी रियल्टी इंडेक्स करीब 3% तक गिरा है।
शेयर बाजार में गिरावट का एक कारण विदेशी निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना है। इस बिकवाली का असर कई शेयरों पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों के जाने से बाजार कमजोर हुआ है।
नोट- किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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