
बिजनेस डेस्क। शेयर मार्केट से पैसा कमाना न तो बहुत आसान है और ना ही मुश्किल। ये बात साबित की है मशहूर इन्वेस्टर और शेयर मार्केट एक्सपर्ट भरत झुनझुनवाला ने। अपने पहले इन्वेस्टमेंट में ही 60% का प्रॉफिट कमाने वाले झुनझुनवाला के पास अब करोड़ों का पोर्टफोलियो है। हालांकि, उनके लिए करोड़ों रुपए कमाना इतना आसान भी नहीं था। कई बार उन्होंने अपनी और घरवालों की जमा पूंजी तक गंवा दी थी। लेकिन बाद में सही अप्रोच, मार्केट रिसर्च और गलतियों से सबक लेते हुए उन्होंने कामयाबी हासिल की। जानते हैं उनकी इन्वेस्टमेंट जर्नी और सक्सेस स्टोरी।
कोलकाता में रहने वाले मारवाड़ी परिवार के भरत झुनझुनवाला ने 2005 में फाइनेंस में अपनी पोस्टग्रैजुएशन पूरी की। उनके मुताबिक, मैं फाइनेंस के फील्ड में कुछ बड़ा करना चाहता था, लेकिन परिवार के दबाव में मुझे अपने फैमिली बिजनेस को ज्वॉइन करना पड़ा। इस दौरान मैंने देखा कि मेरे पिताजी और दूसरे लोग जो निवेश करते थे, वो ज्यादातर बैंक एफडी में होता था और वहां रिटर्न उतना ज्यादा नहीं मिलता था।
भरत झुनझुनवाला के मुताबिक, मेरे परिवार में शेयर मार्केट से किसी का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन मैंने आईपीओ बाजार का रिटर्न देखते हुए पहली बार पिताजी को सलाह दी कि हमें IPO मार्केट में पैसा लगाना चाहिए। 2006 में आईपीओ मार्केट का काफी बज था, जितने भी आईपीओ बाजार में आते सब शानदार रिटर्न दे रहे थे।
पिताजी को काफी समझाने के बाद वो तैयार हो गए और मैंने उनसे 10 लाख रुपए लेकर आईपीओ में इन्वेस्ट कर दिए। कुछ ही समय में 10 लाख के 16 लाख बन गए। यानी मुझे 2 साल में 60% यानी 6 लाख रुपए का प्रॉफिट हुआ। इस पर मैंने पिताजी से कहा- इसे कहते हैं धंधा। इसके बाद तो मैं सातवें आसमान पर उड़ने लगा। मुझे लगा, भला इससे भी अच्छा कोई बिजनेस हो सकता है क्या?
IPO से मुनाफे के बाद मैंने सेकेंडरी मार्केट यानी सीधे शेयरों में पैसा लगाने की सोची। मैंने अपने ब्रोकर्स से कुछ अच्छे शेयरों के नाम मांगे, जो अच्छा रिटर्न दे सकते थे और जिनमें पैसा लगाया जा सकता था। इसके बाद मुझे जितनी फाइनेंस की नॉलेज थी, मैंने उसे अप्लाई करते हुए कुछ शेयरों में पैसा इन्वेस्ट किया।
2008 तक सबकुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन तभी दुनिया में सब-प्राइम संकट ने दस्तक दी और पूरा ग्लोबल मार्केट मंदी के चलते ढेर हो गया। एक-एक हफ्ते में मेरे स्टॉक 20-25% गिरने लगे। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये हो क्या रहा है। 3 साल के फंडामेंटल अचानक एक हफ्ते, एक रात में बदल गए। मुझे लगा कि मैं जरूर कुछ न कुछ गलती कर रहा हूं, ये मार्केट फंडामेंटल्स पर तो नहीं चल रहा है।
अपने शेयरों को लगातार गिरते देख मैंने उन्हें संभालने के लिए एवरेज करना शुरू किया और ये मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। एवरेज करते-करते ये हालत हो गई कि मैंने 5-6 लाख रुपए अपने घर से लेकर उन शेयरों में और लगा दिए। उम्मीद थी कि जल्द ही स्टॉक में बाउंस बैक आएगा। हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ।
अब मुझे अपनी पैसों के साथ ही घर की पूंजी डूबने का भी डर सताने लगा था। हालांकि, बहुत हिम्मत करके मैंने उस पूरे पोर्टफोलियो को बेच दिया। इससे मुझे करीब 10 लाख का नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद जो भी पैसा मिला, मैंने उसे निकालकर फिक्सड डिपॉजिट में डाल दिया। चूंकि मुझे नुकसान हुआ था तो मैं हमेशा सोचता था कि इस लॉस को कैसे कवर किया जाए।
मैंने लॉस रिकवर करने के चक्कर में अपनी जिंदगी की दूसरी बड़ी भूल की और कॉल, रिसर्च और टिप प्रोवाइडर्स के चक्कर में पड़कर अंधाधुंध ट्रेडिंग शुरू कर दी। यहां से मार्केट रिकवरी की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन मेरा लॉस अब भी जस का तस था। इन एक्सपर्ट की कोई टिप काम नहीं आई। 10 में से एक में मुनाफा होता तो 9 में फिर लॉस झेलना पड़ता। डेढ़-दो महीने में मैं समझ चुका था कि इनकी सलाह पर मेरे पास जो भी पैसे बचे हैं, सब डूब जाएंगे। अब मुझे लगने लगा था कि शायद शेयर मार्केट मेरे लिए नहीं है।
दोस्तों की सलाह पर मैंने एक बार फिर इन्वेस्टमेंट करना शुरू किया। इस बार मैंने कुछ लॉजकैप कंपनियों के स्टॉक के अलावा म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया। धीरे-धीरे मैं अपना घाटा रिकवर करने लगा। इसी बीच, 2012 में ग्रीस क्राइसिस आ गया। इस बार भी वही सबकुछ हुआ, जो 2008 में हुआ था। अब तो लॉर्जकैप शेयरों के साथ ही म्यूचुअल फंड में भी भारी नुकसान हो रहा था। मैंने फिर सोचा, आखिर क्या गलत हो रहा है और मैं कुछ तो मिस कर रहा हूं।
2012 में मैंने फैसला किया कि अब शेयर मार्केट को खुद सीखूंगा और उसके बाद ही निवेश करूंगा। इसके बाद मैंने टेक्निकल एनालिसिस, प्राइस पैटर्न, डेली मूविंग एवरेजेस के बारे में बारीकी से स्टडी की। इसके बाद मैंने एक मैग्जीन में विलियम ओ नील का एक इंटरव्यू पढ़ा। उन्होंने पैटर्न को लेकर यूएस मार्केट में बहुत गहरी रिसर्च की थी। इसके बाद मैंने उनकी कुछ किताबें पढ़ीं और जाना कि उन्होंने मार्केट की हर एक चीज को मैथामेटिकली समझाया है।
इसके बाद मैंने 3-4 लोगों को अपने साथ लिया और मार्केट में प्राइस पैटर्न पर रिसर्च शुरू की। हमने ये देखा कि कौन-से पैटर्न कब सक्सेसफुल होते हैं, किस कंडीशन में काम करते हैं, किस कंडीशन में फेल होते हैं। किसी शेयर में जब ब्रेकआउट होता है तो वो कितने प्रतिशत मक ऊपर जाता है। ब्रेकआउट फेल होता है तो प्राइस कितना नीचे आता है। डीप रिसर्च के बाद 2015 तक हमारे पास एक खाका तैयार हो चुका था कि कौन-से पैटर्न काम करते हैं और कौन-से नहीं।
इन्हीं रिसर्च के बेस पर मैंने इन्वेस्टमेंट शुरू किया और धीरे-धीरे अपने घाटे को मुनाफे में ले आया। अब एक तरफ मेरी रिसर्च चल रही थी तो दूसरी तरफ ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट। अब मेरा करोड़ों का पोर्टफोलियो बन चुका है। बता दें कि भरत झुनझुनवाला Opulence Inc के फाउंडर हैं। उनके पास MFTA, CMT, CFTe और MSTA समेत कई प्रतिष्ठित डिग्रियां हैं। 17 सालों के ट्रेडिंग अनुभव के साथ उन्होंने Bxtrender इंडिकेटर डेवलप किया, जो दुनिया भर के पोर्टफोलियो मैनेजरों द्वारा बाजार के रुझानों और उलटफेरों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक टूल है।
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