
बिजनेस डेस्क : अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते हैं और समय पर बिल नहीं भरते हैं तो सावधान हो जाइए. क्योंकि अब ऐसा करने पर बैंक आपसे भारी ब्याज वसूल सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बैंकों को क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट पर हाई ब्याज लगाने की परमिशन दे दी है। शुक्रवार, 20 दिसंबर को बैंकों को राहत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें बिलों के भुगतान में देरी पर क्रेडिट कार्ड (Credit Card) पर ब्याज दर सालाना 30% सीमित कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंज्यूमर फोरम के इस फैसले पर रोक लगा दी है।
NCDRC ने अपने एक फैसले में कहा था कि क्रेडिट कार्ड यूजर्स से सालाना 36-50% तक ब्याज वसूलना काफी ज्यादा है। यह एक तरह से सूदखोरी और शोषण है। इसके बाद इसे 30% तक सीमित कर दिया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगाने के बाद बैंकों को बड़ी राहत मिली है। अब बैंक क्रेडिट कार्ड पर 30 से ज्यादा यानी 50% तक ब्याज वसूल सकेंगे।
16 साल पुराने यह मामला अब समाप्त हो गया है। न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की बेंच स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, सिटी बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस और HSBC जैसे बैंकों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट के सामने सवाल उठाया गया था कि क्या National Consumer Disputes Redressal Commission को क्रेडिट कार्ड यूजर्स से ली जाने वाली ब्याज की सीमा तय करने का अधिकार है। इस फैसले की दलीलें सुनने के बाद बेंच ने इस फैसले पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अब बैंक बकाया बिल के भुगतान में देरी पर तगड़ी पेनॉल्टी लगा सकेंगे।आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 30% क्रेडिट कार्ड यूजर्स पहले से ही डिफ़ॉल्ट कैटेगरी में हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का दबाव उन पर बढ़ सकता है। भारत से उलट कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए क्रेडिट कार्ड ब्याज को लेकर सख्त हैं। वहां क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरें 9.99% से लेकर 24% तक हैं।
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