
Tenant Electricity Rights: अगर आप किराए के घर में रहते हैं और कभी ऐसा डर लगा है कि मकान मालिक नाराज होकर आपकी बिजली या पानी बंद कर सकता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि बिजली कोई सुविधा नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है। मकान मालिक और किराएदार के बीच केस चल रहा हो, तब भी किराएदार को अंधेरे में नहीं रखा जा सकता। 15 दिसंबर 2025 को आए इस फैसले ने हजारों किराएदारों को बड़ी राहत दी है, खासकर उन लोगों को जो लंबे समय से किराए के मकान में रह रहे हैं और किसी न किसी कानूनी विवाद में फंसे हैं।
इस केस में किराएदार साल 2016 से दिल्ली में एक मकान के तीसरे फ्लोर पर रह रहा था। कुछ समय तक आर्थिक दिक्कतों के चलते वह किराया और बिजली बिल समय पर नहीं चुका पाया। इसके बाद मकान मालिक ने किराए की बकाया राशि वसूलने के लिए कोर्ट में केस कर दिया, जो अभी भी चल रहा है। इसी बीच बिजली वितरण कंपनी BSES राजधानी ने बिजली कनेक्शन काट दिया और कहा कि दोबारा कनेक्शन तभी मिलेगा जब मकान मालिक की NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लाई जाएगी। मकान मालिक ने NOC देने से इनकार कर दिया, इतना ही नहीं पानी की सप्लाई भी बंद कर दी और बिजली मीटर को ताले में बंद कर दिया। हालांकि, किराएदार ने बाद में पूरा बकाया बिजली बिल चुका दिया, लेकिन इसके बावजूद बिजली दोबारा नहीं जोड़ी गई। मजबूर होकर किराएदार ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
किराएदार की तरफ से कहा गया कि वह पिछले कई सालों से कानूनी तरीके से उस घर में रह रहा है। बिजली मीटर भले ही मकान मालिक के नाम पर हो, लेकिन बिजली का इस्तेमाल वह कर रहा था और बिल भी वही भर रहा था। बिल की जो बकाया राशि थी, वह भी चुका दी गई है, इसके बाद बिजली काटे रखना पूरी तरह गलत है। सिर्फ NOC न मिलने के कारण बिजली रोकना गैरकानूनी है।
BSES राजधानी की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि मकान मालिक ने मीटर को लॉक कर दिया है और बिना उसकी सहमति बिजली बहाल करना संभव नहीं है। साथ ही मकान मालिक ने लिखित तौर पर बिजली न जोड़ने को कहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि बिजली जिंदगी का मूल हिस्सा है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले जीवन और गरिमा के अधिकार से जुड़ी हुई है। कोर्ट ने कहा कि जब तक किसी अदालत का अंतिम बेदखली आदेश नहीं आ जाता, तब तक किराएदार का कब्जा अवैध नहीं माना जा सकता। ऐसे में मकान मालिक और किराएदार के बीच चल रहा केस बिजली जैसी बुनियादी सुविधा रोकने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक से बिजली जैसी जरूरी सुविधा छीनकर उसे दबाव में नहीं डाला जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञ के मुताबिक, इस केस में सबसे अहम बात यह रही कि किराएदार लंबे समय से कानूनी रूप से उस मकान में रह रहा था और बिजली का बकाया भी चुका चुका था। कोर्ट ने यह मानने से इनकार कर दिया कि सिर्फ मकान मालिक की NOC न होने के कारण बिजली रोकी जा सकती है। कोर्ट ने साफ कहा कि निजी विवादों को किराएदार पर दबाव बनाने का हथियार नहीं बनाया जा सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने BSES राजधानी को आदेश दिया कि वह 19 दिसंबर 2025 को मौके पर जाकर बिजली कनेक्शन बहाल करे। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस की मदद भी ली जा सकती है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि बिजली जोड़ने के लिए मकान मालिक की NOC जरूरी नहीं होगी। हालांकि अगर किराएदार आगे चलकर बिजली बिल नहीं चुकाता है, तो कंपनी को बिजली काटने का अधिकार होगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश किराएदार को मकान पर मालिकाना हक नहीं देता और न ही चल रहे दूसरे मामलों को प्रभावित करेगा।
यह फैसला साफ बताता है कि अगर आप कानूनी तरीके से किसी घर में रह रहे हैं और बिजली बिल चुका रहे हैं, तो कोई भी आपको बिजली से वंचित नहीं कर सकता। मकान मालिक का गुस्सा, NOC या कोर्ट केस, इनमें से कोई भी वजह बिजली काटने के लिए काफी नहीं है। अगर मकान मालिक आपकी बिजली या पानी बंद कर देता है, तो सबसे पहले अपने सभी बिल क्लियर रखें। इसके बाद बिजली कंपनी को लिखित शिकायत दें। अगर फिर भी सुनवाई न हो, तो आप हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर सकते हैं।
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