
नई दिल्ली. केंद्रीय बजट पर चर्चा शुरू हो गई है। उद्योग, स्वास्थ्य, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, शिक्षा समेत हर क्षेत्र को इस बार के बजट से काफी उम्मीदें हैं। खासकर ईमानदारी से टैक्स भरने वाले मध्यम वर्ग के लोग और ज्यादा छूट चाहते हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। इस बार के बजट पर कई उम्मीदें हैं।
जनवरी के पहले हफ्ते में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई क्षेत्रों के दिग्गजों और विशेषज्ञों के साथ बैठकें की हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की मांग, दबाव और बदलाव पर फीडबैक लिया है। 6 दिसंबर से 6 जनवरी तक एक महीने तक निर्मला सीतारमण ने कई क्षेत्रों के स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा की है और राय ली है। परंपरा के अनुसार 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। इस बारे में केंद्र सरकार को अभी आधिकारिक घोषणा करनी है। लेकिन इस बार 1 फरवरी शनिवार होने के कारण तारीख में बदलाव की बातें सामने आई थीं। लेकिन तारीख बदलने की संभावना नहीं है।
टैक्सपेयर्स की सबसे बड़ी मांग
मध्यम वर्ग के लोग टैक्स से परेशान हैं। खासकर वेतनभोगी वर्ग टैक्स में और ज्यादा छूट चाहता है। इस बारे में काफी चर्चा हो रही है। इस बार टैक्स छूट 10 लाख तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही थी। भारत के करोड़ों लोग अब टैक्स छूट की मांग कर रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री टैक्स के मामले में काफी ट्रोल हुई थीं। पॉपकॉर्न पर टैक्स समेत कई टैक्स के मुद्दों पर उन्हें ट्रोल किया गया था। इसलिए इस बार के बजट पर मध्यम वर्ग की नजर है।
स्वास्थ्य बीमा पर टैक्स में कटौती
स्वास्थ्य बीमा कम दामों पर उपलब्ध होने की संभावना है। क्योंकि इस बार स्वास्थ्य बीमा पर टैक्स कम करने का प्रस्ताव है। 2047 तक भारत के हर व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार स्वास्थ्य बीमा को और आसान बनाने की कोशिश कर रही है।
इसके साथ ही केंद्रीय बजट पर कई क्षेत्रों की बड़ी उम्मीदें हैं। खासकर रोजगार क्षेत्र में ज्यादा प्रोत्साहन की उम्मीद है। युवाओं को रोजगार देने के लिए केंद्रीय बजट में योजनाओं की उम्मीद की जा रही है। इससे बेरोजगारी कम करने और देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रोजगार के क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने की उम्मीद है। महिला और बच्चों की योजना, कृषि, किसान, शिक्षा, गरीब समेत हर क्षेत्र की कोई न कोई उम्मीद है।
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