नोएडा-गुरुग्राम में आपकी भी सैलरी रेंट में हो जाती है खत्म? ये 3 हैक्स बचाएंगे पैसे!

Published : Jun 04, 2026, 06:42 PM IST
Money Saving Hacks

सार

How to Save Money in High Rent Cities: नोएडा और गुरुग्राम में सिंगल्स के लिए रेंट का क्या रेट चल रहा है? दिल्ली-NCR में सैलरी का एक बड़ा हिस्सा रेंट में जाने से कैसे बचाएं? क्या कोई ऐसा तरीका है, जिससे रेंट पर ज्यादा से ज्यादा बचत हो सके? 

Rent Saving Hacks in Delhi-NCR: महीने की पहली तारीख को सैलरी अकाउंट में आते ही अच्छा लगता है, लेकिन दिल्ली-NCR के दो सबसे बड़े टेक-कॉरपोरेट हब नोएडा और गुरुग्राम (Gurugram) में नौकरी करने और सिंगल रहने वालों के लिए ये खुशी ज्यादा देर नहीं टिकती। कुछ ही दिनों में किराया, बिजली बिल, खाना और आने-जाने का खर्च बैंक बैलेंस को तेजी से कम कर देता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या कोई तरीका है, जिससे किराया भी दिया जाए और हर महीने कुछ पैसे भी बच जाएं? जवाब है- हां, सिर्फ आपको कुछ स्मार्ट फैसले लेने होंगे। आइए जानते हैं वो 3 हैक्स, जो हर महीने आपकी जेब खाली होने से बचाएंगे।

नोएडा-गुरुग्राम में कितना रेंट है?

नोएडा और गुरुग्राम के अच्छे इलाकों में रेंट की बात करें, तो 1 RK (वन रूम किचन) का किराया ₹10,000 से लेकर ₹20,000 से ज्यादा तक हो सकता है। ये सोसाइटी और सुविधाओं के आधार पर कम या ज्यादा भी हो सकता है। PG (पेइंग गेस्ट) का रेंट ₹10,000 से ₹20,000 तक आसानी से पहुंच जाता है, जहां खाना और वाईफाई शामिल तो होता है, लेकिन प्राइवेसी लगभग जीरो होती है। वहीं 1 BHK फ्लैट का किराया ₹15,000 से लेकर ₹35,000 से ज्यादा महीना तक हो सकता है। अब अगर किसी फ्रेशर या यंग प्रोफेशनल की शुरुआती सैलरी ₹40,000 से ₹50,000 है, तो ज्यादातर हिस्सा तो सिर्फ रहने में ही खर्च हो जाता है। इसके बाद बिजली बिल, मेड का खर्चा, वाईफाई और खान-पान मिलाकर महीने के आखिरी हफ्ते में जेब में कुछ भी बच पाना पॉलिबल नहीं है।

सिंगल्स की बचत क्यों नहीं हो पाती?

मेट्रो शहरों में रहने वाले ज्यादातर युवा एक जैसी गलतियां करते हैं। वे ऑफिस के पास महंगा फ्लैट ले लेते हैं, जरूरत से ज्यादा बड़ा घर किराए पर ले लेते हैं, बजट बनाए बिना खर्च करते हैं और अकेले रहने के लिए ज्यादा किराया देते हैं। इन वजहों से सैलरी का बड़ा हिस्सा सिर्फ रहने में ही खर्च हो जाता है।

रेंट पर पैसे बचाने के लिए 3 हैक्स

स्मार्ट फ्लैट शेयरिंग अपनाएं

अकेले रहने के टशन में 1 BHK या इंडिपेंडेंट 1 RK लेना सबसे घाटे का सौदा है। इसकी बजाय शेयरिंग देख सकते हैं। अगर आप अकेले ₹20,000 का 1 BHK लेते हैं, तो पूरा खर्च आपका है। इसकी जगह अगर आप अपने ही ऑफिस के 2-3 दोस्तों के साथ मिलकर किसी अच्छी सोसाइटी में ₹36,000 का 3 BHK फ्लैट रेंट पर ले लेते हैं, तो हर किसी का खर्च घटकर सिर्फ ₹12,000 आ जाता है। मतलब हर महीने ₹8,000 की बचत कर सकते हैं। इसके अलावा मेड, वाईफाई और मेंटेनेंस का खर्च भी 3 हिस्सों में बंट जाता है।

मेट्रो स्टेशन से 10 मिनट दूर लें फ्लैट

गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड या नोएडा के सेक्टर-62 जैसे प्राइम लोकेशन के बिल्कुल पास घर ढूंढना मतलब अपनी जेब पर खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा है। रियल एस्टेट का सीधा नियम है, मेट्रो स्टेशन या मेन ऑफिस हब से जितनी दूरी बढ़ेगी, किराया उतना ही कम होगा। मेट्रो स्टेशन से ई-रिक्शा या ऑटो की दूरी पर (करीब 10-15 मिनट दूर) घर लें। वहां जो फ्लैट आपको प्राइम लोकेशन पर ₹25,000 का मिल रहा था, वही ₹15,000 में मिल जाएगा। रोज का ₹50 का ऑटो किराया देकर भी आप महीने के ₹9,000 साफ बचा सकते हैं।

को-लिविंग और सर्विस अपार्टमेंट्स का नया ट्रेंड

अगर आप ब्रोकर के चक्कर, भारी-भरकम सिक्योरिटी डिपॉजिट और हर महीने मेड और बिजली बिल के झंझट से पूरी तरह छुटकारा चाहते हैं, तो 'मैनेज्ड को-लिविंग स्पेस' का रुख कर सकते हैं। आजकल नोएडा-गुरुग्राम में कई ऐसे स्टार्टअप्स और कंपनियां हैं जो पूरी तरह फर्निश्ड रूम देती हैं। इनके फिक्स रेंट में ही आपका खाना, लॉन्ड्री (कपड़े धोना), हाई-स्पीड वाईफाई, जिम और हाउसकीपिंग शामिल होती है। अलग-अलग 5 जगह बिल भरने के बजाय एक जगह फिक्स अमाउंट देने से बजट नहीं बिगड़ता और फिजूलखर्ची रुक सकती है।

हर महीने पैसे बचाने के लिए ये काम भी करें

  • बाहर खाना कम करें।
  • बिजली और इंटरनेट प्लान का सही इस्तेमाल करें।
  • गैर-जरूरी सब्सक्रिप्शन बंद करें।
  • सैलरी आते ही कुछ रकम अलग सेविंग अकाउंट में डाल दें।
  • खर्च लिखने की आदत डालें।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है, इसे वित्तीय सलाह न मानें। इसमें दी गई किराए, सैलरी और खर्च से जुड़ी जानकारी अलग-अलग सार्वजनिक रिपोर्ट्स, बाजार के रुझानों और सामान्य अनुमानों पर आधारित है। अलग-अलग इलाके, सोसाइटी, सुविधाओं और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार वास्तविक किराया और खर्च अलग हो सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय, निवेश या बजट योजना बनाने से पहले अपनी जरूरतों और आर्थिक स्थिति का आकलन जरूर करें। जरूरत पड़ने पर किसी एक्सपर्ट की भी सलाह लें।

 

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