Old Monk पर क्या सच में लग गया बैन? जानिए पूरा मामला

Published : Aug 06, 2026, 01:42 PM IST
Old Monk

सार

Old Monk Ban Reality: क्या ठेकों पर अब Old Monk, Royal Challenge और McDowell's नहीं मिलेगी? जानिए शराब में आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाने पर लगाए गए बैन का पूरा सच।

Old Monk Ban News: क्या अब ठेकों पर ओल्ड मॉन्क (Old Monk) नहीं मिलेगी? बुधवार को एक कड़े एक्शन के बाद से ही लोगों के बीच ये सवाल उठ रहा है। दरअसल, फूड सेफ्टी रेगुलेटर (FSSAI) ने शराब कंपनियों के एक बड़े 'खेल' का पर्दाफाश किया है। जांच में पता चला है कि जिन मशहूर शराब ब्रांड्स को लोग बड़े चाव से पीते हैं, उन्हें ज्यादा टेस्टी दिखाने के लिए उनमें ऊपर से आर्टिफिशियल फ्लेवर यानी नकली स्वाद मिलाया जा रहा था। इस मिलावट को पकड़ने के बाद सरकार ने Old Monk, McDowell's और Royal Challenge जैसी कई फेवरेट शराब की बिक्री पर तुरंत रोक (Ban) लगा दी है। इस खबर के बाद से दारू प्रेमियों में हड़कंप है। आइए जानते हैं कि क्या सच में अब आपकी फेवरेट दारू नहीं मिलेगी और इन कंपनियों का यह पूरा खेल क्या है...

किन-किन ब्रांड्स पर हुई कार्रवाई?

Old Monk The Legend

Old Monk Gold Reserve

Old Monk XXX Matured Rum

McDowell's No.1 Rum

Bagpiper Deluxe Whisky

Royal Challenge Whisky

Antiquity Blue Whisky

Old Cask Deluxe XXX Rum

Central Province Whisky

McDowell's No.1 Celebration Matured XXX Rum

आखिर FSSAI को क्या गड़बड़ी मिली?

जांच के दौरान कुछ सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में रम में 'Rum Flavor' और व्हिस्की में 'Whisky Flavor' जैसे फ्लेवर मिलाए जा रहे थे, जिससे प्रोडक्ट का स्वाद और खुशबू उसी तरह महसूस हो, जैसा असली प्रोडक्ट में होता है। FSSAI का कहना है कि इस तरह की प्रैक्टिस उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है और तय मानकों के अनुरूप नहीं मानी जाती।

क्या फ्लेवर डालना पूरी तरह गलत है?

FSSAI ने साफ किया है कि हर तरह के फ्लेवर पर रोक नहीं है। आपत्ति उस स्थिति पर है, जहां किसी स्टैंडर्ड शराब में उसी शराब का फ्लेवर जोड़कर उसके असली स्वाद जैसा एहसास बनाया जाए और उसे उसी रूप में बेचा जाए।

क्या Old Monk अब कभी नहीं मिलेगी?

ये कार्रवाई महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से जुड़े प्रोडक्ट्स पर की गई है। यह पूरा बैन नहीं है। सरकार ने सिर्फ उन फैक्ट्रियों के माल पर रोक लगाई है, जहां यह मिलावट पकड़ी गई थी। बाकी जगहों पर बनी शराब बिकती रहेगी। इसके अलावा, सरकार ने कंपनियों को एक बड़ी छूट भी दी है। जो दारू पहले ही बनकर बाजार (ठेकों) में पहुंच चुकी है, उसे बेचा जा सकता है। लेकिन इसके लिए एक बड़ी शर्त रखी गई है। अब कंपनियों को पुरानी बोतलों के ठीक सामने (Front Label) पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखकर बताना होगा कि इसमें 'आर्टिफिशियल फ्लेवर' मिला हुआ है। साथ ही सरकार ने सख्त आदेश दिया है कि आगे से जो भी नई शराब बनेगी, उसमें कोई भी बाहरी स्वाद या केमिकल नहीं मिलाया जाएगा।

शराब कंपनियों को अब क्या करना होगा?

FSSAI ने आगे के प्रोडक्शन के लिए साफ निर्देश दिए हैं कि Rum में Rum Flavor नहीं मिलाया जाएगा। Whisky में Whisky Flavor नहीं मिलाया जाएगा। ऐसे किसी भी फ्लेवर का इस्तेमाल नहीं होगा, जिससे कंज्यूमर भ्रमित हों।

क्या इसका मतलब शराब सुरक्षित नहीं थी?

ऐसा कहना सही नहीं होगा। इस कार्रवाई का संबंध नियमों और तय मानकों के पालन से है। अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि इन सभी उत्पादों को स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित किया गया हो।

मामला अब कोर्ट तक क्यों पहुंच गया?

इस पूरे विवाद के बाद कुछ शराब कंपनियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। United Spirits ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। Associated Alcohol & Breweries ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है। कंपनियों का कहना है कि उनके लेबल और प्रोडक्ट मौजूदा नियमों के अनुरूप हैं और वे लंबे समय से उद्योग में अपनाई जा रही प्रक्रिया का पालन कर रही हैं। अब इस मामले पर अदालत में सुनवाई होगी।

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