
मुंबई. आरबीआई ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी में बदलाव किया है। बुधवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने तीसरी मॉनिटरी पॉलिसी की समीक्षा की। आरबीआई ने जो समीक्षा की है, उसमें यह पाया गया है कि वैश्विक तनाव के कारण खाद्य तेलों पर दबाव अभी बना रहेगा। आरबीआई ने अच्छे मॉनसून के भी संकेत दिये हैं और माना है कि इससे ग्रामीण स्तर पर खपत में बढ़ोतरी होगी। आप नीचे दिये गये प्वाइंट्स समझ सकते हैं कि आखिर क्या बदलाव हुए हैं।
1. लेडिंग रेट (रेपो) में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई है। बीते 5 हफ्तों में दूसरी बार यह बढ़ोतरी की गई है।
2. रेपो रेट कोरोना महामारी से पहले की स्थिति से नीचे बना हुआ है।
3. महंगाई दर रोकने के लिए एकोमोडेटिव पॉलिसी को हटाने पर फोकस किया जा रहा है।
4.चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 5.2 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत तक रहने की संभावना है।
5. वैश्विक सप्लाई में बाधा की वजह से खाद्य तेलों की कीमतें दबाव में रहेंगी। दुनिया में जारी तनाव की वजह से घरलू महंगाई दर पर विपरीत प्रभाव जारी रहेगा।
6. चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना है। इकोनॉमिक एक्टिविटी से मजबूती आएगी। अच्छे मॉनसून के कारण ग्रामीण स्तर पर उपभोग में तेजी आएगी।
7. क्रेडिट कार्ड को भी यूपीआई से लिंक किया जा सकेगा। रुपे क्रेडिट कार्ड पहले लिंक होंगे।
8.होम लोन के लिए कॉपरेटिव बैंक्स की लेंडिंग लिमिट दोगुनी की गई है।
9. ग्रामीण कॉपरेटिव बैंक भी कमर्शियल रियल एस्टेट व रेजिडेंशियल हाउसिंग सेक्टर को लोन दे सकेंगे। अर्बन कॉपरेटिव बैंक भी डोर स्टेप बैंकिंग सुविधा दे सकेंगे।
10. रेकरिंग पेमेंट के लिए ई-मेंडेंट ऑन कार्ड की राशि को 5 हजार से बढ़ाकर 15 हजार किया गया है।
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