
RBI Draft Guidelines: डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों का डेटा सबसे कीमती संपत्तियों में शामिल हो गया है। ऐसे में यदि बैंक या NBFC आपकी निजी जानकारी की सुरक्षा में लापरवाही बरतते हैं, तो अब उन्हें सख्त जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डेटा सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस को मजबूत बनाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनका उद्देश्य ग्राहकों की जानकारी को साइबर खतरों और डेटा लीक से बेहतर तरीके से सुरक्षित करना है।
RBI के ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार, सभी बैंक, NBFC और उसके अधीन आने वाली अन्य वित्तीय संस्थाओं को डेटा रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करना होगा। यह सिस्टम संस्थानों को डेटा से जुड़े जोखिमों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण में मदद करेगा।
रिजर्व बैंक का कहना है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के कारण डेटा अब वित्तीय संस्थानों की सबसे महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों में से एक है। इसलिए डेटा की सुरक्षा, गुणवत्ता और सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
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नए ड्राफ्ट नियमों के तहत प्रत्येक रेगुलेटेड संस्था को एक डेटा गवर्नेंस कमेटी बनानी होगी या किसी मौजूदा वरिष्ठ समिति को यह जिम्मेदारी देनी होगी। इस समिति में डेटा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), सूचना सुरक्षा, बिजनेस, रिस्क मैनेजमेंट और कंप्लायंस से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा संबंधित संस्था का बोर्ड पूरे डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क की निगरानी करेगा और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करेगा, ताकि डेटा सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
RBI ने प्रस्ताव दिया है कि ग्राहक के डेटा को उसके संग्रह से लेकर उपयोग, स्टोरेज और हटाए जाने तक पूरी लाइफ साइकल के दौरान सुरक्षित रखा जाए। साथ ही संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि डेटा केवल वैध और निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही एकत्र किया जाए तथा उसका उपयोग सभी कानूनी और नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप हो।
रिजर्व बैंक ने इन ड्राफ्ट नियमों पर 17 अगस्त तक बैंक, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। RBI का मानना है कि मजबूत डेटा गवर्नेंस व्यवस्था से साइबर हमलों, डेटा लीक और वित्तीय नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकेगा, जिससे डिजिटल बैंकिंग पहले से अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी।
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