Azam Khan Jauhar University: रामपुर में आजम खान के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश जारी हुआ है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण का हवाला देते हुए बड़ा फैसला लिया।
Rampur Jauhar University Demolition: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला विश्वविद्यालय परिसर में बने भवनों को लेकर है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जांच और सुनवाई के बाद विश्वविद्यालय के 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि इन भवनों के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक निर्माण स्वीकृति नहीं ली गई थी।
जांच के बाद RDA ने जारी किया ध्वस्तीकरण आदेश
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, जिले में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान के तहत मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की भी जांच कराई गई। क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी किया गया और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
विश्वविद्यालय ने 8 जुलाई को लिखित जवाब दाखिल किया, जबकि 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन, रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। सभी दस्तावेजों और दलीलों की समीक्षा के बाद उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया।
यह भी पढ़ें: ICC को 'ईंट-दर-ईंट' ढहाने की धमकी! आखिर अमेरिका इस अदालत से इतना क्यों डरता है?
विश्वविद्यालय ने क्या कहा, RDA ने क्यों खारिज की दलील?
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि ग्राम सिंगनखेड़ा 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था। इसलिए उस समय RDA से नक्शा स्वीकृत कराने की बाध्यता नहीं थी। साथ ही यह भी कहा गया कि अधिकांश निर्माण पुराने हैं, इसलिए उन्हें वर्तमान नियमों के आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता।
हालांकि, रामपुर विकास प्राधिकरण ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि निर्माण के समय संबंधित सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य था, चाहे क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो या नहीं। जांच में जिला पंचायत के रिकॉर्ड में केवल मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे स्वीकृत मिले, जबकि बाकी 38 भवनों के लिए कोई वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं थी।
सिर्फ दो भवनों को मिली थी मंजूरी
डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को निर्माण स्वीकृति की प्रक्रिया की जानकारी थी। इसका प्रमाण यह है कि मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के लिए विधिवत अनुमति ली गई थी, जबकि अन्य 38 भवन बिना स्वीकृति के बनाए गए।
प्राधिकरण ने आदेश में कहा कि भवन की वैधता का आधार निर्माण के समय लागू कानून के अनुसार सक्षम प्राधिकारी से मिली स्वीकृति होती है। यदि निर्माण बिना अनुमति के किया गया है तो उसे वैध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर धारा 59 के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता भी खुला रखा गया है।
यह भी पढ़ें: चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई, भारत ने मारी बाजी! सामने आई चौंकाने वाली GDP रिपोर्ट
