प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशाखापत्तनम में POWERGRID की दो बड़ी ट्रांसमिशन परियोजनाओं का लोकार्पण और 5,550 करोड़ रुपये की नई ग्रीन एनर्जी परियोजना का शिलान्यास किया। जानिए इन परियोजनाओं से देश के बिजली नेटवर्क और स्वच्छ ऊर्जा मिशन को कैसे मिलेगा बड़ा फायदा।

भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID) की दो महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इसके साथ ही उन्होंने 4.5 गीगावाट क्षमता वाली एक नई ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन परियोजना की आधारशिला भी रखी।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में उत्पादित सौर और पवन ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड तक अधिक कुशलता से पहुंचाना है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और बिजली आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी।

कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम

विशाखापत्तनम में आयोजित इस कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नज़ीर, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण मौजूद रहे।

इसके अलावा केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी, केंद्रीय राज्य मंत्री भूपति राजू श्रीनिवासन वर्मा और आंध्र प्रदेश के आईटी एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

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किन परियोजनाओं का हुआ लोकार्पण?

प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले कुरनूल पवन एवं सौर ऊर्जा क्षेत्र (भाग-A और भाग-B) से जुड़ी ट्रांसमिशन प्रणाली राष्ट्र को समर्पित की। करीब 3,547 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना क्षेत्र में उत्पादित अक्षय ऊर्जा को बिना बाधा राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इसके अलावा अनंतपुरम (2,500 मेगावाट) और कुरनूल (1,000 मेगावाट) सौर ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी लगभग 823 करोड़ रुपये की ट्रांसमिशन परियोजना का भी लोकार्पण किया गया। इससे इन क्षेत्रों में उत्पादित सौर ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी।

₹5,550 करोड़ की नई परियोजना की रखी आधारशिला

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कुरनूल-IV नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (चरण-I) की ट्रांसमिशन परियोजना का भी शिलान्यास किया।

करीब 5,550 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना 4.5 गीगावाट अतिरिक्त ग्रीन एनर्जी को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने के लिए विकसित की जाएगी। इसके पूरा होने के बाद देश की ट्रांसमिशन क्षमता और मजबूत होगी तथा नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग का रास्ता खुलेगा।

स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मिलेगी नई रफ्तार

भारत तेजी से सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि, केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित और कुशल तरीके से राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।

विशाखापत्तनम में शुरू की गई इन ट्रांसमिशन परियोजनाओं का उद्देश्य इसी जरूरत को पूरा करना है। इससे भविष्य में अधिक मात्रा में ग्रीन एनर्जी को राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा और स्वच्छ ऊर्जा आधारित बिजली आपूर्ति को मजबूती मिलेगी।

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जो विद्युत मंत्रालय के तहत एक 'महारत्न' सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, इन परियोजनाओं के जरिए देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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