US Sanctions On ICC: अमेरिका और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के बीच टकराव तेज हो गया है। अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ICC को लेकर बड़ा बयान दिया है।
अमेरिका और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के बीच टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ICC पर तीखा हमला बोलते हुए इसे "ईंट-दर-ईंट ढहा देने" तक की चेतावनी दी है। अमेरिका का आरोप है कि यह अदालत उसके सहयोगियों और सैनिकों को निशाना बना रही है, जबकि ICC का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर अपराधों की जांच और न्याय सुनिश्चित करना है। इस विवाद ने वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
ICC को लेकर अमेरिका क्यों दिखा आक्रामक?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका उन देशों पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है जो ICC का समर्थन करते हैं। वाशिंगटन चाहता है कि अमेरिकी सहायता या सुरक्षा सहयोग पर निर्भर देश सार्वजनिक रूप से यह कहें कि वे अमेरिकी सैनिकों और अधिकारियों के खिलाफ ICC के किसी भी अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करेंगे।
बताया जा रहा है कि जो देश ऐसा करने से हिचक रहे हैं, उन्हें वीजा प्रतिबंध, यात्रा प्रतिबंध और आर्थिक कार्रवाई जैसी चेतावनियां दी जा रही हैं। अमेरिका स्वयं ICC का सदस्य नहीं है और लंबे समय से इस अदालत के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाता रहा है।
आखिर ICC से अमेरिका को डर क्यों?
अमेरिका और ICC के बीच मतभेद नए नहीं हैं। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ICC ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों द्वारा कथित युद्ध अपराधों की जांच शुरू की थी। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने ICC के कुछ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे।
हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों ने विभिन्न देशों से ICC की सदस्यता और फंडिंग पर पुनर्विचार करने की अपील की है। इसी बीच कुछ मानवाधिकार संगठनों ने ईरान से जुड़े मामलों में अमेरिका की कथित सैन्य कार्रवाई की जांच की मांग भी उठाई है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं किया है।
ICC क्या है और किन मामलों की करता है जांच?
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी और इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में है। यह अदालत नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों की जांच करती है।
वर्तमान में 124 देश ICC के सदस्य हैं, लेकिन अमेरिका, भारत, चीन और रूस इसके सदस्य नहीं हैं। अमेरिका का कहना है कि उसके सैनिकों और अधिकारियों को राजनीतिक कारणों से अंतरराष्ट्रीय मुकदमों का सामना नहीं करना चाहिए। इसी सोच के तहत वर्ष 2002 में अमेरिका ने American Service-Members' Protection Act पारित किया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी सैन्य कर्मियों को ICC की कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देना था।
मार्को रुबियो के हालिया बयान के बाद अमेरिका और ICC के बीच बढ़ता टकराव आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक न्याय व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।


