
नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में 'बल्क डिपॉजिट' यानी बड़ी रकम की जमाओं से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है। इसका मुख्य मकसद बैंकों को ब्याज दरें तय करने में ज्यादा आजादी देना और ग्राहकों के लिए चीजों को और पारदर्शी बनाना है। इस नए प्रस्ताव पर आम लोग और एक्सपर्ट्स 20 जून, 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं। इसके बाद ही इसे लागू करने पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।
बल्क डिपॉजिट का मतलब है वो बड़ी रकम जो ग्राहक बैंकों में जमा करते हैं। नए नियमों का लक्ष्य बैंकों को इन डिपॉजिट्स पर ब्याज दरें तय करने की ज्यादा आजादी देना और ब्याज दरों को लेकर एक जैसा सिस्टम बनाना है। अब बैंकों को हर कारोबारी दिन की शुरुआत से पहले अपनी वेबसाइट पर ब्याज दरों की पूरी लिस्ट साफ-साफ बतानी होगी। बैंक सिर्फ पहले से तय और घोषित दरों पर ही ब्याज दे पाएंगे। इससे ग्राहकों के लिए अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना आसान हो जाएगा।
छोटे जमाकर्ताओं पर इसका तुरंत कोई असर नहीं होगा। यह बदलाव खासतौर पर बड़ी जमाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। लेकिन, आने वाले समय में छोटे जमाकर्ताओं को भी इसका फायदा मिल सकता है। जब बैंकों को बड़ी रकम पर ब्याज दरें तय करने की आजादी मिलेगी, तो उनके बीच मुकाबला बढ़ेगा। इस कंपटीशन की वजह से, रिटेल निवेशक भविष्य में अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर ज्यादा कॉम्पिटिटिव और बेहतर ब्याज दरें पा सकते हैं।
अब एक बार एफडी करके सालों तक निश्चिंत बैठना ठीक नहीं होगा। पहले लगभग सभी बैंकों में ब्याज दरें एक जैसी होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जमा की रकम, अवधि और बैंक की उस वक्त की जरूरतों के हिसाब से दरों में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए, एफडी रिन्यू कराने से पहले अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना जरूर कर लें।
ज्यादा ब्याज पाने की जल्दी में निवेश करते समय कुछ गलतियां न करें। आप जिस डिपॉजिट पर निवेश कर रहे हैं, उस पर सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि समय से पहले पैसे निकालने पर बैंक की पेनल्टी भी जरूर चेक कर लें। यह भी देखें कि क्या बैंक स्वीप-इन एफडी की सुविधा देता है। ब्याज कब मिलेगा और इमरजेंसी में पैसे निकालने के क्या नियम हैं, यह भी जान लेना चाहिए।
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