RBI ने रेपो रेट नहीं घटाया, फिर भी EMI कैसे कम करें? 5 सिंपल तरीके

Published : Feb 06, 2026, 11:21 AM IST

Loan EMI Reduce Smart Tricks: RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए 5.25% पर बरकरार रखा है। यानी मौजूदा लोन की EMI न घटेगी और ना ही बढ़ेगी। लेकिन अच्छी खबर ये है कि रेपो रेट न बदलने के बावजूद भी आप अपनी EMI कम कर सकते हैं। जानिए 5 सबसे आसान तरीके 

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EMI कम करने का तरीका नंबर-1

ज्यादातर लोग EMI कम करवाने के लिए सिर्फ ब्याज दर पर ध्यान देते हैं, लेकिन असली खेल लोन की अवधि (Tenure) में होता है। अगर आपकी सैलरी थोड़ी बढ़ी है या खर्च कंट्रोल में हैं, तो आप बैंक से बात करके EMI वही रख सकते हैं और लोन की अवधि कम करवा सकते हैं। इससे फायदा ये होगा कि कुल ब्याज कम देना पड़ेगा और लोन जल्दी खत्म होगा। कई मामलों में बैंक खुद से यह ऑप्शन नहीं बताते, इसलिए आपको पूछना जरूरी है।

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EMI कम करने का तरीका नंबर-2

हर बार बड़ी रकम जमा करना जरूरी नहीं है। अगर आप साल में एक बार भी 50,000 या 1 लाख रुपए की प्रीपेमेंट कर देते हैं, तो EMI या लोन की अवधि दोनों पर असर पड़ता है। प्रीपेमेंट सीधे आपके मूल लोन अमाउंट को कम करती है, जिससे आगे का ब्याज अपने आप घट जाता है। बोनस, टैक्स रिफंड या एक्स्ट्रा इनकम का सही इस्तेमाल यही है।

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EMI कम करने का तरीका नंबर-3

अगर आपका होम लोन या पर्सनल लोन कई साल पुराना है, तो मुमकिन है कि आप अभी भी ज्यादा ब्याज दे रहे हों। ऐसे में लोन बैलेंस ट्रांसफर एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है। कई बैंक नए ग्राहकों को कम ब्याज दर ऑफर करते हैं। ट्रांसफर से EMI कम हो सकती है या अवधि घट सकती है। हालांकि, प्रोसेसिंग फीस और चार्ज जरूर चेक करें, तभी फैसला लें।

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EMI कम करने का तरीका नंबर-4

अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो बैंक को यह अधिकार होता है कि वह ब्याज दर समय-समय पर रिव्यू करें, लेकिन कई बार बैंक अपने आप EMI कम नहीं करते हैं। आप एक साधारण रिक्वेस्ट डालकर बैंक से रेट रिव्यू के लिए कह सकते हैं। कई मामलों में 0.10%-0.25% तक की राहत मिल जाती है, जो लॉन्ग टर्म में EMI पर अच्छा असर डालती है।

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EMI कम करने का तरीका नंबर-5

यह छोटा सा तरीका है, लेकिन काफीअसरदार है। अगर आपकी EMI सैलरी आने से पहले कट जाती है, तो अक्सर ओवरड्राफ्ट या क्रेडिट कार्ड की मदद लेनी पड़ती है। EMI डेट को सैलरी के ठीक बाद शिफ्ट करवा देने से आपको कैश फ्लो बेहतर लगता है। इससे लेट फीस, पेनल्टी और एक्स्ट्रा ब्याज से बचा जा सकता है यानी इन-डायरेक्ट रूप से EMI का दबाव कम होता है।

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