
बिजनेस डेस्क। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने आर्थिक सुस्ती के बाद आने वाले दिनों में महंगाई की चिंता जताई है। भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मजदूरों की कमी से सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है। सरकार का राजकोषीय घाटा भी बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई कुछ महीनों में सबसे ऊंचे स्तर पर हो सकता है।
एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में महंगाई से निपटने के लिए सुझाव भी दिए हैं। एसबीआई की रिपोर्ट "इकोरैप" में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को सुझाव दिया कि खुदरा मुद्रास्फीति की गणना के वक्त प्रोडक्ट की ऑनलाइन कीमतों को भी ध्यान में रखा जाए। क्योंकि महामारी के बाद ज्यादातर लोग जरूरतों के लिए ऑनलाइन स्टोर पर भरोसा कर रहे हैं।
क्या वजह है
रिपोर्ट के मुताबिक एमओएसपीआई ने सेवाओं सहित अप्रासंगिक वस्तुओं को शामिल करते हुए खुदरा मुद्रास्फीति को कम करके आंका, और इस तथ्य को संज्ञान में नहीं लिया कि कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण उनकी खपत बहुत कम हो गई है। इसका विपरीत असर पड़ा है। नौकरियां छिनने और लंबे लॉकडाउन से कारोबार की शक्ल देश-दुनिया में बदली है।
मोदी ने की है मीटिंग
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक जून 2020 में भारत के खुदरा महंगाई की दर 6.09 प्रतिशत थी। एसबीआई की गणना में महंगाई के आंकड़े वास्तविक महंगाई के मुकाबले काफी ज्यादा दिखे हैं। उधर, अर्थव्यवस्था की खराब हालत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंतित नजर आ रहे हैं।
कई पैकेजेज़ की घोषणा के बावजूद आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ी हुई हैं। इस बीच गुरुवार को प्रधानमंत्री ने एक मीटिंग की है और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चर्चा की है।
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